जिला शिमला के ठियोग का जंगल। जागरण
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में वन विभाग के वनरक्षक हीं नहीं बल्कि देवता भी जंगलों के रक्षक बनकर उनकी रखवाली करते हैं। प्रदेश में कई ऐसे जंगल हैं, जिनकी रखवाली देवता करते हैं। इन घने जंगलों से देव आदेश के बिना कोई कोई सूखी लकड़ी तक भी नहीं उठा सकता है। यह क्षेत्र राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में सरकार के नाम है, लेकिन इन जंगलों की रखवाली देवता करते हैं।
यह खुलासा हिमाचल प्रदेश बायोडायवर्सिटी बोर्ड की एक रिसर्च में सामने आया है कि पहाड़ी राज्य हिमाचल में ऐसे जंगल हैं, जो पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यहां लोगों की ऐसी आस्था है कि पेड़ को काटना तो दूर देवता के आदेश के बिना कोई भी जंगल से सूखी लकड़ी तक नहीं उठा सकते हैं।
इन जिलों में हैं ऐसे जंगल
शिमला, कुल्लू, मंडी, सिरमौर, चंबा, किन्नौर और सोलन में ऐसे जंगल हैं, जिनमें देवदार और अन्य प्रजातियों के पेड़ लगे हैं, वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यहां लोगों की आस्था अपने आराध्य देवताओं में इतनी है कि वे बिना पूछे न तो जंगल में जाते हैं और न ही लकड़ी काट सकते हैं और न ही किसी जानवर का शिकार करते हैं।
जिला शिमला में 128 जंगल और कुल्लू में 109 जंगल देवताओं के नाम से चल रहे हैं। इन जंगलों में किसी तरह का कोई अवैध कटान नहीं होता है।
ठियोग के जंगल पर इस देवता का राज
जिला शिमला के ठियोग के चीची के जंगल की सुरक्षा देवता जनोग करते हैं। देवता के आदेश के बिना न तो कोई जंगल में जाता है और न ही लकड़ियां काट सकता है। यदि कोई उल्लंघन करता है तो देवता की मंदिर कमेटी जुर्माना कर सकती है, लेकिन अभी ऐसो कोई मामला नहीं आया है।
देवताओं के नाम पर पड़े हैं नाम
हिमाचल में 500 के करीब ऐसे जंगल हैं, जहां देवता रक्षाबंधन की तरह जंगल बंधन करते हैं। यानि देवता इन जंगलों की रक्षा करते हैं और लोगों को यहां पर पेड़ काटने की पूरी तरह से मनाही है। इन जंगलों को देवता के नाम से जाना जाता है, हालांकि यह सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन इनके नाम देवताओं के नाम पर पड़े हैं।
कहां कितने जंगल देवता के अधीन
- जिला शिमला: 128
- जिला कुल्लू: 109
- जिला मंडी: 45
- जिला सोलन: 38
- जिला सिरमौर:29
- जिला चंबा: 25
- जिला किन्नौर: 16
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