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जीआरपी-किला लाल सिंह के पुल की जर्जर हाल रेलिंग (फोटो: जागरण)
जागरण टीम, गुरदासपुर। जिले में अंग्रेजों के जमाने से लेकर आधुनिक समय तक बने पुल आज भी बिना रेलिंग या टूटी-फूटी रेलिंग के सहारे खड़े हैं, जो रोजाना यात्रियों के लिए मौत का खतरा बने हुए हैं। पिछले कई सालों में इन पुलों पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों की जानें बाल-बाल बची हैं, लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण एवं लोक निर्माण विभाग की ओर से इन पुलों की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है।
नतीजतन इन पुलों से गुजरना रोजाना एक जोखिम भरा अनुभव बन गया है, खासकर रात के समय या कोहरे के दिनों में। सबसे भयावह हालत किला लाल सिंह इलाके में अंग्रेजों के शासनकाल में बने पुल की है। यह पुल दशकों से इलाके की मुख्य यातायात लाइफलाइन रहा है, लेकिन आज इसकी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। पुल की रेलिंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है, जिसमें से कई हिस्से पूरी तरह गायब हैं, जबकि बचे हुए हिस्से किसी भी वक्त टूट सकते हैं।
इसी पुल पर करीब सात साल पहले एक बड़ा हादसा हो चुका है, जब एक कार नहर में जा गिरी थी। उस समय कार में सवार पूरे परिवार की जान पर बन आई थी। सौभाग्य से आस-पास के साहसी लोगों ने तत्काल मदद के लिए हाथ बढ़ाया और जोखिम उठाते हुए नहर में कूदकर सभी कार सवारों को बाहर निकाल लिया। उनकी त्वरित कार्रवाई से बड़ा नुकसान टल गया, लेकिन उस हादसे ने पुल की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था। दुखद बात यह है कि उस हादसे के बाद भी विभाग ने पुल की रेलिंग ठीक कराने या नई लगवाने की कोई पहल नहीं की गई।
केवल यही एक मामला नहीं है। कुछ दिन पहले ही गुरदासपुर-श्री हरगोबिंदपुर रोड पर अड्डा सिधवां से गुरुद्वारा छोटा घल्लूघारा साहिब जाने वाली सड़क पर स्थित कोटली सैनियां गांव के पास सेम ड्रेन के पुल पर एक और चौंकाने वाली घटना हुई। इस पुल पर रेलिंग न होने के कारण एक कार संतुलन खोकर सीधे नाले में जा गिरी। वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों की सहायता से कार में सवार लोगों को बाहर निकाला गया।
घटना में लोग बाल-बाल बच गए, लेकिन यह घटना एक बार फिर उन खतरनाक पुलों की ओर इशारा कर गई, जो जिले भर में मौजूद हैं। स्थानीय निवासी और इन पुलों से रोजाना गुजरने वाले यात्री इन पुलों की स्थिति से बेहद नाराज और चिंतित हैं। किला लाल सिंह के लोगों का कहना है कि यह पुल हमारे लिए एक अभिशाप बन गया है। रात में या कोहरे में गाड़ी चलाते हुए डर लगता रहता है।
एक छोटी सी गलती और गाड़ी नहर में जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दिनों कोहरे का मौसम है, जिसमें इन पुलों से गुजरना और भी जोखिम भरा हो गया है। दृश्यता कम होने और पुल की सीमाएं न दिखाई देने के कारण हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में अगर विभाग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो कोहरे के दिनों में किसी बड़ी त्रासदी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिले के इन खतरनाक पुलों की स्थिति एक स्पष्ट संकेत है कि बुनियादी ढांचे के रखरखाव और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक उदासीनता किस हद तक पहुंच चुकी है। नए निर्माण के साथ-साथ मौजूदा संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार और विभाग की उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है। अतीत के हादसे चेतावनी दे चुके हैं।
अब समय आ गया है कि इन चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए सभी खतरनाक पुलों की पहचान कर उनकी रेलिंग तत्काल लगाई जाए या मरम्मत की जाए, ताकि आगे कोई अनहोनी न हो। जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इस सुरक्षा को सुनिश्चित करने में और देरी की कीमत किसी निर्दोष जान से चुकानी पड़ सकती है।
उधर, मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन निर्मल सिंह का कहना है कि किला लाल सिंह पुल के बारे सरकार को प्रपोजल बनाकर भेज दी गई है। विभाग की तरफ से इस पुल के टूटे किनारे जल्द ही ठीक करवा दिए जाएंगे। सरकार की तरफ से प्रपोजल मंजूर हो जाने पर पहल के आधार पर इस पुल को चौड़ा कर इसका नवीनीकरण कर दिया जाएगा। |
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