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कुलसचिव पद का ज्वाइन करने पहुंचे डॉ. विश्वास त्रिपाठी को बिना पदभार ग्रहण किए लौटना पड़ा।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में हाईवोल्टेज ड्रामा खत्म होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को कुलसचिव पद का ज्वाइन करने पहुंचे डॉ. विश्वास त्रिपाठी को बिना पदभार ग्रहण किए लौटना पड़ा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह के 29 दिसंबर 2025 की कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने का आदेश दिया है। कार्रवाई निरस्त किए जाने के बाद सोमवार को ज्वाइन करने पहुंचे कुलसचिव को कार्यालय में ताला लटका मिला।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व कुलसचिव डा. विश्वास त्रिपाठी पद ग्रहण करने से पहले कुलपति से मिलने के लिए भी पहुंचे, लेकिन कुलपति ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया। विश्वविद्यालय में दिन भर चर्चा का विषय कुलसचिव को पदभार ग्रहण नहीं कराने का बना रहा।
शिक्षकों ने बताया कि पूर्व कुलसचिव डा. विश्वास त्रिपाठी पद ग्रहण करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सोमवार को पद ग्रहण नहीं कराया गया है। उन्होंने इसका विरोध भी जताया, लेकिन प्रकिया का हवाला देकर उन्हें निराशा के साथ वापस लौटना पड़ा।
यह रहा है पूरा मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीबीयू के कुलपति प्रो राणा प्रताप सिंह के 29 दिसंबर 2025 की कार्रवाई को निरस्त कर दिया था, जिसमें कुलपति ने कुलसचिव डा. विश्वास त्रिपाठी को कार्यमुक्त कर दिया था। कुलपति की कार्रवाई को कुलसचिव डा. विश्वास त्रिपाठी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कुलपति की कार्रवाई को असंवैधानिक और पूर्वाग्रह से ग्रसित मानते हुए निरस्त कर दिया था। वहीं विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डा. विनीत ने बताया कि विश्वविद्यालय उच्च न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करता है। उनके द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का विधिसम्मत रूप से पालन कर रहा है। |
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