नोएडा इंजीनियर की मौत का मामला। जागरण
डिजिटल डेस्क, ग्रेटर नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दिल दहला देने हादसे ने पूरे प्रदेश को दहला दिया है। पूरे सिस्टम की लापरवाही के चलते सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज को अपनी जान गंवानी पड़ी।
इस घटना को लेकर सीएम योगी ने भी संज्ञान लिया और शासन ने कार्रवाई करते हुए नोएडा प्राधिकरण सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है। लेकिन अभी सवाल यह भी है कि बाकी जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी? वहीं, इस हादसे को लेकर एक ऐसा सच सामने आया है, जिसे जानकर हर कोई हैरान है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने तीन साल पहले नोएडा प्राधिकरण को एक पत्र लिखा था। जिसके जरिए आधिकारिक सूचना जारी की, इसमें अतिरिक्त बारिश के पानी को निकालने और उसे हिंडन नदी में प्रवाहित करके जल निकासी के लिए गड्ढे में हेड रेगुलेटर लगाने की आवश्यकता की बात कही गई थी। क्योंकि हेड रेगुलेटर पानी के प्रवाह को नियंत्रित करता है और नाली या नहर में अतिरिक्त गाद जमा होने से रोकता है।
सिंचाई विभाग के इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि प्रस्तावित कार्य के लिए बजट का प्रावधान किया गया था, लेकिन पत्र फाइलों में खो गया और परियोजना कभी शुरू नहीं हो पाई।
वहीं, इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि उन्हें ऐसे किसी पत्र की जानकारी नहीं है। अधिकारी ने यह भी बताया कि जहां इंजीनियर की पानी में कार डूबी है, वहां बारिश का पानी नहीं बल्कि आसपास के घरों का पानी जमा होता है।
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सिस्टम की लापरवाही से जिंदगी हार गया युवराज
ग्रेटर नोएडा में दो विभागों के बीच तालमेल और प्रशासनिक कमी के बीच 4.30 करोड़ रुपये और इससे पनपी लापरवाही में एक साॅफ्टवेयर इंजीनियर अपनी जिंदगी हार गया। वर्ष 2023 में नोएडा प्राधिकरण ने दावा किया था कि सेक्टर-150 में 4.30 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा हो गया है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर रही।
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(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) |
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