मरीज की पंजीकरण प्रक्रिया, डाॅक्टर का परामर्श, ई-पर्ची जारी करने और दवा वितरण तक सभी चरण ऑनलाइन होंगे।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। सरकारी अस्पतालों में पर्ची का झंझट खत्म होगा। कार्ड से लेकर दवा लिखने तक सबकुछ ऑनलाइन होगा। मरीजों के लिए सबसे बड़ी परेशानी लंबी कतारें, कागजी पर्चियां और बार-बार वही जानकारी लिखवाना होती है। अब इन सबसे छुटकारा दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मास्टर प्लान तैयार किया गया है।
प्लान के तहत शहर के अस्पतालों में पेपरलेस सिस्टम लागू करने की योजना तैयार की गई है। इस सिस्टम के लागू होने से सेक्टर-16 के गवर्नमेंट मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल, सिविल अस्पताल -22, सिविल अस्पताल-45 और सिविल अस्पताल मनीमाजरा में मरीजों को पेपरलेस इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
मरीज की पर्ची से लेकर दवा वितरण तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इसके लिए ‘नेक्स्ट जेन’ नामक उन्नत साॅफ्टवेयर तैयार किया है। इसकी मदद से मरीज की पंजीकरण प्रक्रिया, डाॅक्टर का परामर्श, ई-पर्ची जारी करने और दवा वितरण तक सभी चरण ऑनलाइन होंगे। पेपरलेस सिस्टम लागू होने से न केवल अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को भी लंबी लाइनों और कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में पहले लागू हो चुका है पेपरलेस सिस्टम
स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य निदेशक डा. सुमन सिंह ने बताया कि शहर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में पहले से ही पेपरलेस सिस्टम का मरीजों को लाभ मिल रहा है। बीते वर्ष इस सिस्टम की शुरुआत की गई थी। हेल्थ सेंटरों में मिल रहे अच्छे नतीजों को देखते हुए अस्पतालों में इसको लागू करने को लेकर लगातार योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। जल्द ही इस सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा।
ऐसे काम करेगा नया सिस्टम
डाटा एंट्री : मरीज के पहुंचते ही डाटा एंट्री आपरेटर साफ्टवेयर में उसकी सारी जानकारी दर्ज करेगा।
डाॅक्टर से परामर्श : इसके बाद मरीज डाक्टर से मिलेगा, जो उसी साफ्टवेयर में उसकी केस हिस्ट्री देखकर परामर्श देंगे।
डिजिटल पर्ची : डाक्टर ई-पर्ची जारी करेंगे, जिससे दवा वितरित की जाएंगी।
रिकाॅर्ड प्रबंधन : सारी जानकारी आनलाइन स्टोर होगी, जिससे भविष्य में इलाज को ट्रैक करना आसान होगा।
पेपरलेस और डिजिटल होने से होंगे ये फायदे
- मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री का आसानी से ट्रैक करने में मदद
- बार-बार जांच और रिपोर्ट की आवश्यकता में कमी
- डाॅक्टर और स्टाफ की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी
- कागजी फाइलों से मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण में योगदान
- प्रशासन के लिए नीतिगत निर्णयों में मददगार डेटा
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