जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में पोषण से जुड़ी योजनाएं वर्षों से चल रही हैं, लेकिन एक समग्र और वैज्ञानिक नीति का अभाव रहा है। पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में आज भी कुपोषण, एनीमिया और पोषक तत्वों की कमी बड़ी चुनौती है। वहीं दूसरी ओर बदलती जीवनशैली से मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग बढ़ रहे हैं।
मिड-डे मील, आईसीडीएस और पीडीएस जैसी योजनाओं में भोजन की वास्तविक पोषण गुणवत्ता का आंकलन नहीं हो पाता। इसी कमी को दूर करने और आम नागरिक की थाली तक पोषण की सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सरकार ने पहली बार प्रदेशव्यापी पोषण नीति बनाने का निर्णय लिया।
प्रदेश की पोषण नीति भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को वैज्ञानिक आधार देगी। इसके तहत न्यूट्रिशनल प्रोफाइलिंग लागू होगी, जिससे भोजन में मौजूद कैलोरी, आयरन, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की नियमित जांच की जाएगी।
स्कूलों, आंगनबाड़ियों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में मिलने वाले भोजन की लैब जांच अनिवार्य होगी। साथ ही स्थानीय पोषक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दिया जाएगा और जन-जागरूकता अभियान चलेंगे। यह नीति कुपोषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने में हिमाचल के लिए मजबूत आधार बनेगी। |