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सुपौल के 25% किसानों के पास नहीं है फार्मर आईडी, पीएम सम्मान निधि की 22वीं किस्त पर संकट

deltin33 3 hour(s) ago views 782
  



जागरण संवाददाता, सुपौल। जिले के शत-प्रतिशत किसान खासकर पीएम किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित किसानों के फार्मर आईडी बनाए जाने को लेकर कृषि और राजस्व विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जनवरी माह में ही दो बार विशेष अभियान का आयोजन हाथी के दांत साबित हो गया। एक ही माह में दो बार विशेष अभियान चलाए जाने के बाद भी पीएम किसान योजना से आच्छादित 25 फीसद किसानों का फार्मर आईडी नहीं बन सका है।

हालांकि, किसानों के ई केवाईसी किए जाने का मामले में स्थिति कुछ बेहतर है। अब सवाल उठता है कि जब विशेष अभियान चलाए जाने के बाद भी सभी किसानों का फार्मर आईडी नहीं बन सका तो फिर क्या ऐसे किसान पीएम किसान सम्मन निधि योजना से वंचित हो जाएंगे।

हालांकि, विभाग का साफ तौर पर कहना है कि जिन किसानों का फार्मर आईडी नहीं बन पाएगा वैसे किसान योजना के तहत दिए जाने वाले 22 वीं किस्त से वंचित हो सकते हैं।
61 हजार 417 किसानों का ही हो सका फार्मर रजिस्ट्रेशन

जिले में 2 लाख 72 हजार 352 किसान प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। दो अभियान बीत जाने के बाद इसमें से मात्र 61 हजार 417 किसानों का ही फार्मर रजिस्ट्रेशन हो सका है। जबकि ई-केवाईसी एक लाख 73 हजार 316 किसानों का पूरा किया जा सका है। इस तरह देखें तो सरकार के इस महत्वपूर्ण अभियान में राजस्व विभाग की उदासीनता दिखाई दे रही है।

दरअसल, कृषि विभाग को ई-केवाईसी तथा राजस्व विभाग को फार्मर आईडी बनाने का जिम्मा था, परंतु राजस्व विभाग ने यहां भी कंजूसी बरती। परिणाम है कि फार्मर आईडी जेनरेट में जिले का ग्राफ काफी नीचे है। यदि स्थिति यही रही तो किसानों का एक बड़ा तबका पीएम किसान योजना से वंचित हो जाएंगे।
किसान निबंधन आवश्यक

फार्मर आईडी के लिए किसानों को ई केवाईसी तथा किसान निबंधन आवश्यक है। इसी आधार पर किसानों को सम्मान निधि और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा। ई केवाईसी तो आसानी से हो रहा है परंतु स्वयं के नाम पर जमाबंदी नहीं रहने से किसान रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है, जबकि पुरखों के नाम जमीन को स्वयं के नाम करने को लेकर रैयत कार्यालय का चक्कर काटते थक जाते हैं, लेकिन यह संभव नहीं हो पाता।

पिछले दिनों सरकार ने भी अभियान चलाकर किसानों से आवेदन लिए, लेकिन आज तक इस आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी परिणाम है कि जिले में आज भी बाप दादा के नाम जमाबंदी चल रही है।
किसानों के बीच उठ रहे सवाल दर सवाल

सरकार की इस योजना को लेकर अब किसानों के बीच कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जमाबंदी के आधार पर ही पीएम सम्मान योजना के लाभ से किसानों को वंचित करने का निर्णय सरासर गलत है। अंचल कार्यालय की मनमानी से जमाबंदी में सुधार नहीं हो रहा है। फिर भी किसान पूर्वजों के नाम पर ही सरकार को राजस्व देते हैं।

अब तक किसानों को इस योजना की 21वीं किस्त देने के बाद लाभार्थी के नाम से जमाबंदी का नियम बनाना किसानों के साथ अन्याय है। जमाबंदी में सारी गड़बड़ी तो सिस्टम का है और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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