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अब क्यों जरूरी है Digital India 2.0? 2026 तक GDP का 20% डिजिटल, MSME, लोन और AI पर होगा फोकस
नई दिल्ली| करीब दस साल पहले ऑनलाइन बिल भरना या तुरंत पैसे ट्रांसफर करना किसी भविष्य की चीज लगती थी। आज वही काम रोजमर्रा का हिस्सा बन चुका है। सब्जी बेचने वाला UPI ले रहा है, छोटे कारोबारी ऑनलाइन GST रिटर्न फाइल कर रहे हैं और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर मिल रही हैं। इस बदलाव का नाम है- डिजिटल इंडिया, जिसने भारत के काम करने, लेन-देन करने और जीने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
बड़ा सवाल यह है कि अब आगे क्या? अगर भारत को फाइनेंशियल इनोवेशन में दुनिया का लीडर बनना है, तो अब डिजिटल इंडिया 2.0 (Digital India 2.0) की जरूरत है, जो सिस्टम को ज्यादा स्मार्ट, सुरक्षित और सबके लिए आसान बनाए।
अब तक की सफलता
2015 में डिजिटल इंडिया की शुरुआत का मकसद साफ था- टेक्नोलॉजी के जरिए हर नागरिक तक सेवाएं पहुंचाना। इसके नतीजे भी बेहद मजबूत रहे। जैसे-
- आधार कार्ड ने हर भारतीय को डिजिटल पहचान दी
- UPI ने मोबाइल को वॉलेट बना दिया, बिना खर्च तुरंत ट्रांसफर
- डिजीलॉकर से जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन सुरक्षित हुए
- अकाउंट एग्रीगेटर (AA) से सहमति के साथ फाइनेंशियल डेटा शेयर कर कर्ज आसान हुआ।
इन डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) प्लेटफॉर्म्स की वजह से आज भारत हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन कर रहा है और डिजिटल पेमेंट गांवों तक पहुंच चुका है।
Digital India 2.0 क्यों जरूरी?
पहला फेज पहुंच का था, अब अगला फेज भरोसे, इनोवेशन और बिना रुकावट के अनुभव का होना चाहिए।
- 2026 तक डिजिटल गतिविधियां GDP का करीब 20% हिस्सा बन सकती हैं
- लोग तुरंत लोन, फास्ट ऑनबोर्डिंग और सुरक्षित ट्रांजैक्शन चाहते हैं
- सिंगापुर और EU जैसे देश प्राइवेसी और AI में आगे बढ़ रहे हैं, भारत को भी लीड करना होगा
Digital India 2.0 के 5 बड़े फोकस
1. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपग्रेड करना
- डिजीलॉकर में आसान OTP आधारित कंसेंट
- टैक्स और रोजगार डेटा को जोड़ना
- MSME को GST और बैंक डेटा शेयर कर लोन की सुविधा
2. ऑनबोर्डिंग को सच में इंस्टेंट बनाना
- AI आधारित एजेंटलेस वीडियो KYC
- आधार-पैन लिंक से 24x7 वेरिफिकेशन
3. प्राइवेसी को केंद्र में रखना
- डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत लोगों को जागरूक करना
4. AI को रेगुलेट करते हुए इनोवेशन बढ़ाना
- RBI और IndiaAI के नियमों से फेयर और ट्रांसपेरेंट AI
- अलग AI कानून नहीं, मौजूदा नियमों को मजबूत करना
5. MSME के लिए कर्ज आसान बनाना
- MSME KYC सरल करना
- डिजीलॉकर और अकाउंट एग्रीगेटर से फास्ट क्रेडिट
भविष्य में दिखेंगे क्या-क्या बदलाव?
डिजिटल इंडिया 2.0 सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि भरोसे और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की कहानी है। अगर यह सही तरीके से लागू हुआ तो:
- फाइनेंशियल सर्विस सस्ती, तेज और सुरक्षित होंगी
- छोटे कारोबारियों को आसानी से कर्ज मिलेगा
- भारत डिजिटल फाइनेंस में ग्लोबल लीडर बनेगा
दुनिया भारत को देख रही है। अब समय है डिजिटल समावेशन से डिजिटल लीडरशिप की ओर बढ़ने का। जिसे डिजिटल इंडिया 2.0 से ही साकार किया जा सकता है।
(नोटः लेखक पैसाबजार डॉट कॉम के फाउंडर-सीईओ हैं।) |
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