टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की बढ़ रहीं दिक्कतें। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। प्रश्न के बदले धन लेने के मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को मंजूरी देने के मुद्दे पर कानून के मुताबिक विचार करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने लोकपाल को दो महीने का समय दिया है। हालांकि, न्यायमूर्ति अनिल क्षत्रपाल व न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि समय बढ़ाने के लिए कोई और अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महुआ मोइत्रा व सीबीआई ने पीठ के समक्ष कहा कि वे लोकपाल के दो महीने के लिए समय बढ़ाने के अनुरोध का विरोध नहीं कर रहे हैं। इस पर पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि समय बढ़ाने के लिए कोई और अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।
19 दिसंबर, 2025 को हाई कोर्ट ने लोकपाल के नवंबर के उस आदेश को रद कर दिया था। इसमें सीबीआई को मोइत्रा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की मंज़ूरी दी गई थी और उसे लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत एक महीने के भीतर मंज़ूरी के मुद्दे पर विचार करने के लिए कहा था। महुआ पर उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी की ओर से सवाल पूछने के बदले धन लेने का आरोप है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को एक शिकायत लिखकर आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के लिए रिश्वत ली थी। निशिकांत दुबे ने दावा किया कि इन आरोपों की शुरुआत देहाद्रई द्वारा उन्हें लिखे गए एक पत्र से हुई थी।
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