मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar News: राज्य कैबिनेट में विस्तार के आसपास ही बोर्ड, निगम और मनोनयन के जरिए गठित होने वाले आयोगों का पुनर्गठन होगा। कुछ नए आयोग गठित भी होंगे।
एनडीए के घटक दल अभी इस समीक्षा में जुटे हैं कि पिछले साल जिन नेताओं-कार्यकर्ताओं का मनोनयन किया गया था, वे विधानसभा चुनाव में कितने कारगर हुए।
कई पदधारकों के विरूद्ध दल विरोधी आचरण की शिकायतें भी मिली थीं। घटक दलों ने शिकायतों की जांच कर ली है। संगठन के छोटे पदधारकों पर कार्रवाई भी हुई है।
अब कार्रवाई के दायरे में वे लोग भी आएंगे, जिन्हें मनोनयन के आधार पर मंत्री स्तर का वेतन और दूसरी सुविधाएं दी जा रही हैं।
सबसे अधिक मनोनयन कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति और नागरिक परिषद में हुआ है। चुनाव से ठीक पहले नागरिक परिषद का विस्तार जिलों तक किया गया।
चुनाव के बाद आई थी शिकायतें
इसी तरह कार्यक्रम कार्यान्वयन की समितियां प्रखंड स्तर पर बनाई गईं। इनके माध्यम से एनडीए के हजारों कार्यकर्ताओं को ताकतवर बनाया गया।
इसी तरह बोर्ड, निगम और आयोग के पद भी भरे गए। अपेक्षा की गई थी कि ये नए पदधारक विधानसभा चुनाव में एनडीए के उम्मीदवारों के लिए मददगार साबित होंगे।
लेकिन, चुनाव के बाद कई पदधारकों के बारे में उम्मीदवारों की शिकायत आई कि वे जीत के बदले हार के प्रबंध में जुटे रहे।
मधुबनी के बाबूबरही की जदयू विधायक मीना कामत ने एक मंत्री स्तरीय पदधारक के विरूद्ध लिखित शिकायत की है। अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
बिहार नागरिक परिषद में मंत्री स्तर के कुछ पद जिन्हें दिए गए थे, वे विधायक बन गए हैं। जदयू के मंजीत कुमार सिंह और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के माधव आनंद नागरिक परिषद के उपाध्यक्ष थे। परिषद के पुनर्गठन में इनकी जगह नए को मौका मिलेगा।
युवा आयोग का गठन
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले युवा आयोग के गठन की घोषणा हुई थी। उस समय पदधारकों का मनोनयन नहीं हो सका। उम्मीद की जा रही है कि फरवरी में इस आयोग का गठन हो जाएगा।
इसमें एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्षों के अलावा सात सदस्य होंगे। इसके लिए अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष तय की गई है। इसमें आम कार्यकर्ताओं के बदले विषय विशेषज्ञों को जगह दी जाएगी। |