जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के आंकड़ों ने मतदाता सूची में एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक विसंगति को उजागर किया है। मायके के कागज न मिल पाना महिला मताधिकार की राह में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। जेंडर रेशियो से भी कहीं आगे वोटर लिस्ट में महिला-पुरुष मतदाताओं की संख्या के बीच की खाई और चौड़ी हो गई है। प्रति एक हजार पुरुषों पर 1207 महिलाएं वोटर लिस्ट से बाहर दिख रही हैं। महिला मतदाताओं की कमी लोकतंत्र में आधी आबादी की भागीदारी का सवाल बन रही है।
जनपद की ताजा मतदाता सूची के अनुसार प्रति एक हजार पुरुष मतदाताओं पर केवल 799 महिला मतदाता दर्ज हैं। यह स्थिति तब है, जब जनगणना के अनुसार प्रदेश का जेंडर रेशियो 908 और जनपद का 874 है। जिला प्रशासन के अपने ही आंकड़ों के मुताबिक जनपद में कुल वर्तमान में अनुमानित 10,93,593 महिलाएं हैं। यदि इसमें आयु संरचना का सामान्य मानक लगाया जाए तो करीब 60 प्रतिशत महिलाएं यानी लगभग 6,56,155 महिलाएं 18 वर्ष से अधिक आयु की होनी चाहिए। इसके मुकाबले मतदाता सूची में दर्ज महिला मतदाताओं की संख्या केवल 4,91,824 ही है। साफ है कि कम से कम 1,64,331 महिलाएं मतदाता सूची से बाहर हैं।
यही गणना यदि अनुमानित पुरुष जनसंख्या 12,51,947 के आधार पर की जाए तो पुरुष मतदाताओं में मानक से कमी केवल 1,35,841 निकलती है। इसका सीधा अर्थ है कि महिला मतदाता पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक संख्या में मताधिकार से वंचित हो रही हैं। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो प्रति एक हजार पुरुषों पर 1,207 महिलाएं वोट देने के अधिकार की रेखा से बाहर खड़ी हैं।
विवाह के बाद महिलाओं का नाम, पता और पारिवारिक विवरण बदल जाता है। एसआइआर के मौजूदा नियमों के तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची या माता-पिता के जन्म व निवास से जुड़े प्रमाण मांगे जा रहे हैं। ऐसे में जिन महिलाओं के मायके दूर हैं या जिनके माता-पिता के नाम पहले ही अनुपस्थित, शिफ्टेड या मृतक श्रेणी में चले गए हैं, उनके लिए आवश्यक दस्तावेज जुटा पाना लगभग असंभव हो गया है।
विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो महिला मतदाताओं की सबसे खराब स्थिति अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में है। यहां कुल ईपी रेशियो 48.48 प्रतिशत है, लेकिन महिला ईपी रेशियो गिरकर 45.10 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पुरुष और महिला ईपी रेशियो के बीच 6.33 प्रतिशत का अंतर जनपद में सबसे अधिक है। इसके बाद कायमगंज और भोजपुर का स्थान आता है, जबकि फर्रुखाबाद सदर में अंतर अपेक्षाकृत कम है। यदि स्थिति यही रही तो आगामी चुनावों में हजारों महिलाएं केवल इसलिए मतदान से बाहर रह जाएंगी क्योंकि उनके मायके का रिकार्ड फाइलों में नहीं मिल पाया।
सदर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी व एसडीएम सदर रजनी कांत ने बताया कि महिला मतदाताओं की मैपिंग न हो पाने का सबसे बड़ा कारण महिलाओं के मायके से जुड़े अभिलेखों का न मिल पाना है। बीएलओ व सुपरवाइजरों को मतदाताओं की मदद के लिए लगाया गया है। जिन प्रदेशों में एसआइआर चल रहा है, वहां की सूची तो संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर आनलाइन उपलब्ध है ही, अन्य प्रांतों की सूची भी भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर है।
महिला–पुरुष मतदाता अंतर : आंकड़ों की नजर में
विधानसभा क्षेत्र
ईपी रेशियो
पुरुष ईपी रेशियो
महिला ईपी रेशियो
अंतर
कायमगंज
49.09
51.13
46.74
4.39
अमृतपुर
48.48
51.44
45.10
6.33
फर्रुखाबाद
44.17
45.11
43.09
2.02
भोजपुर
46.89
48.82
44.68
4.14
कुल
47.20
49.15
44.97
4.18
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