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राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनते ही तेजस्वी की हुंकार; कहा-नीतीश के धोखे से मोदी बने पीएम

Chikheang 2026-1-25 19:56:50 views 610
  

दीप प्रज्‍ज्‍वल‍ित कर कार्यकारिणी की बैठक का शुभारंभ करते लालू प्रसाद, तेजस्‍वी यादव व राबड़ी देवी। सौ-एक्‍स  



राज्य ब्यूरो, पटना। यद्यपि राजद में सारे निर्णय तेजस्वी यादव ही ले रहे थे, लेकिन वह अब तक अनौपचारिक रूप से था। अब औपचारिक होगा, क्योंकि रविवार को पार्टी ने उन्हेंं कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया।

सुप्रीमो लालू प्रसाद की अध्यक्षता में पटना में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक मेंं तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव पार्टी महासचिव भोला यादव ने प्रस्तुत किया।

कार्यकारिणी ने सर्व-सम्मति से प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 18 जनवरी को राष्ट्रीय परिषद ने राजद के संविधान में संशोधन कर तेजस्वी को नाम-निशान में परिवर्तन सहित हर निर्णय के लिए लालू के समान अधिकार दे दिया था।
कार्यकारिणी की सहमति से लालू ने सौंपा मनोनयन का प्रमाण-पत्र

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बिहार सहित 27 प्रदेशों के लगभग 250 प्रतिनिधि सहभागी हुए। राबड़ी देवी की उपस्थिति मेंं लालू ने तेजस्वी को मनोनयन का प्रमाण-पत्र सौंपा।

तेजस्वी की कार्यक्षमता की प्रशंसा करते हुए लालू ने कहा कि मेरा आशीर्वाद इनके साथ है। पिता के पैरों पर झुक आए तेजस्वी ने विपरीत परिस्थिति में भी समझौता नहीं करने की प्रतिबद्धता जताई।

राजद को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाने का संकल्प लेते हुए अब तक की अपनी राजनीतिक यात्रा के विभिन्न पड़ावों की चर्चा की।

विक्षुब्धों से सकारात्मक रुख के साथ बातचीत करने का आश्वासन दिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नतमस्तक होने का आरोप लगाया।

अपने फेसबुक पर भावुक पोस्ट कर स्वयं को लालू, राजद और जनता का ऋणी बताया। हालांकि, रोहिणी आचार्य अपने पोस्ट में उन्हें षड्यंत्रकारियों व घुसपैठियों की कठपुतली बता रहीं।

बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव भी स्वीकृत हुआ। उसमें सत्ताधारी एनडीए पर देश की बहुरंगीय-बहुधर्मीय छवि को धूमिल करने के आरोप के साथ वर्तमान परिस्थिति पर चिंता जताई गई।

तय हुआ कि बजट सत्र के बाद तेजस्वी पूरे बिहार का भ्रमण कर बूथ स्तर सांगठनिक इकाइयों का गठन करेंगे। राजद को दूसरे प्रदेशों में भी सुदृढ़ किया जाएगा।

तेजस्वी के नेतृत्व मेंं वरीय नेताओं की एक समिति बनेगी, जो उन प्रदेशों का भ्रमण कर संगठन को निचले स्तर तक ले जाएगी।

उस हर राज्य में राजद चुनाव भी लड़ेगा, जहां उसे जीत या फिर अच्छे मत मिलने की संभावना होगी। कारण यह कि पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा की अपेक्षा है।

दूसरे प्रदेशों के दौरे के क्रम में भाजपा के विरुद्ध साझा संघर्ष के लिए राजनीतिक दलों में सहमति बनाने का प्रयास भी होगा।
बैठक के निष्कर्ष

  • सांगठनिक : बिहार में बूथ स्तर तक इकाई बनेगी। दूसरे प्रदेशों में भी चुनाव लड़ा जाएगा, ताकि राजद को राष्ट्रीय दर्जा मिल सके
  • रणनीतिक : ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान के लिए आंदोलन छेड़ा जाएगा, उसमेंं विपक्षी दलोंं का सहयोग लिया जाएगा
  • राजनीतिक : रोजगार की कानूनी गारंटी, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा, किसानों की कर्ज माफी, निजी क्षेत्र में आरक्षण का प्रविधान और धन के न्यायपूर्ण पुनर्वितरण की नीति पर जोर


इसके साथ ही ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके लिए विपक्षी दलोंं के समर्थन हेतु तेजस्वी अपने स्तर से पहल करेंगे।

तेजस्वी ने दावा किया कि आइएनडीआइए के लिए हुई पहल में अगर जदयू ने धोखा नहीं दिया होता तो नरेन्द्र मोदी आज प्रधानमंत्री नहीं होते।

विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने धोखाधड़ी का आरोप लगाया। कहा कि फिर भी राजद को 1.90 करोड़ वोट मिले, जो पार्टी के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

यह समझने की बात है कि पोस्टल बैलेट की गिनती में हम 107 क्षेत्रों में आगे रहे और ईवीएम के वोटों की गिनती में एनडीए को जीत मिलती है।

मेरा प्रयास होगा कि मैं राजद को फिर से राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता दिलाऊं। प्रत्याशी चयन को लेकर अलग-अलग विश्लेषण हो सकते हैं, लेकिन इस पर सार्वजनिक बहस की आवश्यकता नहीं।

जिन लोगों को परेशानी या शिकायत है, उनसे बात कर समाधान निकाला जाएगा। भाजपा के विरोधी दलों के साथ मिलकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन छेड़ने का आश्वासन दिया।

बैठक का संचालन प्रदेश के प्रधान महासचिव रणविजय साहू एवं प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने किया। राष्ट्रीय महासचिव जय प्रकाश नारायण यादव ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समक्ष पिछली बैठक की कार्यवाही रखी, जिसे संपुष्ट किया गया।

राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी द्वारा महासचिव का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। पूर्व मंत्री आलोक मेहता ने राजनीतिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। चित्तरंजन गगन द्वारा पूर्व सांसद राजनीति प्रसाद, पूर्व प्रदेश महासचिव प्रेम प्रकाश शर्मा एवं संजीव यादव सहित पार्टी के अन्य मृतक साथियों के प्रति शोक प्रस्ताव रखा गया।

एक मिनट तक मौन रहकर श्रद्धांजलि दी गई। अंत में पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। एजाज अहमद, अरुण कुमार यादव, भाई अरुण ने तेजस्वी को बधाई दी और उनके नेतृत्व में राजद के राजनीति के नए शिखर पर स्थापित होने की आशा जताई।
इन राजनीतिक प्रस्तावों पर लगी मुहर

लोकतंत्र एवं संविधान पर गहराता संकट, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता पर संगठित हमले, इतिहास का राजनीतिक अपहरण की निंदा, भाजपा-आरएसएस की वैचारिक राजनीति के विरोध की रणनीत‍ि बनी।  

असहमति के दमन की भर्त्सना, आर्थिक विफलताओं पर गहरी चिंता, सामाजिक न्याय और संविधान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और सामाजिक एकता का आह्वान जैसे पहलुओं का राजनीतिक प्रस्ताव में उल्लेख हुआ।

सभी नागरिकों के लिए रोजगार की कानूनी गारंटी, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा, किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी, शिक्षा और स्वास्थ्य में सार्वजनिक निवेश में वृद्धि पर भी प्रस्‍ताव पारित हुआ।

इसके अलावा निजी क्षेत्र में आरक्षण का प्रविधान, देशव्यापी जातिगत जनगणना की अतिशीघ्र घोषणा, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, सरकारी नौकरियों में रिक्त पदों पर पारदर्शी एवं समयबद्ध नियुक्ति, धन के न्यायपूर्ण पुनर्वितरण की नीति एवं बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की गई।
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