V-BAT Autonomous Drone: भारतीय सेना ने अपनी हवाई सर्विलांस और इंटेलिजेंस क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सेना ने अमेरिकी रक्षा तकनीक कंपनी शील्ड एआई (Shield AI) के साथ डील किया है. इसके तहत अत्याधुनिक V-BAT ऑटोनॉमस ड्रोन सिस्टम और कंपनी के Hivemind आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर के लाइसेंस खरीदे जाएंगे.
इस समझौते के जरिए भारतीय सेना को खास ड्रोन मिलेंगे. जो वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग करने में सक्षम हैं. जिन्हें रनवे की जरूरत नहीं होती है. यह क्षमता पहाड़ी, रेगिस्तानी और दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में बेहद उपयोगी मानी जा रही है. जहां पुराने विमानों का संचालन मुश्किल होता है. V-BAT ड्रोन को खास तौर पर खुफिया, निगरानी और टोही मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है. यह एक बार में 12 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भर सकता है.
ड्रोन की क्या है खासियत?
इस ड्रोन में Hivemind ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर है. यह सॉफ्टवेयर ड्रोन को अपने आसपास के माहौल को खुद समझने, रियल-टाइम में सक्षम बनाता है. इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर या GPS सिग्नल को रोकने वाली स्थिति में ड्रोन ऑपरेशन जारी रख सकता है. जो आधुनिक युद्ध के लिहाज से बेहद जरूरी मानी जा रही है.
यह डील भारत के खास
इस डील का असर केवल ऑपरेशनल क्षमता तक सीमित नहीं रहेगा. यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को भी मजबूती देगा. साल 2025 के अंत में JSW डिफेंस ने हैदराबाद के पास एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निर्माण शुरू किया था. जहां भविष्य में V-BAT जैसे अगली पीढ़ी के ड्रोन सिस्टम का असेंबली, टेस्टिंग और प्रोडक्शन किया जाएगा. इससे भारत में रक्षा उत्पादन बढ़ेगा. हाई-टेक नौकरियों के नए अवसर पैदा होंगे.
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सेना को बड़ा फायदा
V-BAT ड्रोन की तैनाती से इंडियन आर्मी की सीमा निगरानी, और जासूसी क्षमता में बड़ा बढ़ोत्तरी मिलेगी. यह बिना रनवे के ऑपरेशन और लंबी उड़ान क्षमता के कारण यह सिस्टम सीमित संसाधनों में भी प्रभावी साबित हो सकता है. ऐसे समय में जब भारत-चीन सीमा जैसे संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम आधुनिक युद्ध का जरूरी हिस्सा बनते जा रहे हैं.
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