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हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड के निजीकरण और स्मार्ट मीटर का विरोध, 63 स्थानों पर हुआ जोरदार प्रदर्शन

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शिमला के कुमार हाउस में प्रदर्शन करते बिजली बोर्ड के कर्मचारी व पेंशनर्स। जागरण  



जागरण संवाददाता, शिमला। राज्य बिजली बोर्ड के निजीकरण के विरोध में वीरवार को भोजनावकाश के दौरान प्रदेशभर में बिजली बोर्ड कार्यालयों के बाहर 63 स्थानों पर प्रदर्शन किए गए। यह प्रदर्शन बिजली कर्मचारी इंजीनियर की राष्ट्रीय समन्वय कमेटी के आह्वान पर केंद्र सरकार की बिजली क्षेत्र में निजीकरण की नीतियों के विरुद्ध किए।

इस दौरान कर्मचारियों ने दिनभर पेन डाउन एवं टूल डाउन हड़ताल रही। इसका प्रभाव कार्यालयों के साथ फील्ड कार्यों पर भी पड़ा। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा।
स्मार्ट मीटर का भी विरोध

केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटरिंग योजना का भी विरोध किया। इस दौरान कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए नई भर्ती करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, 10-12 वर्ष से कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाने की मांग की। कुछ स्थानों पर प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भी सौंपे। इनमें बिजली बोर्ड के पेंशनरों के साथ विद्युत उपभोक्ताओं ने भी भाग लिया।
कुमार हाउस में सैकड़ों कर्मियों का प्रदर्शन

शिमला के कुमार हाउस में स्थित बोर्ड मुख्यालय के बाहर सैकड़ों कर्मचारियों, अभियंताओं व पेंशनर ने प्रदर्शन किया। प्रदेश के वित्त सचिव के राज्य बिजली बोर्ड के निजीकरण के बयान की भी निंदा की गई।  
क्या कहती है ज्वाइंट कमेटी

ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों पर बिजली कंपनियों के निजीकरण के लिए दबाव बना रही है। इसी दिशा में बिजली कानून में कई संशोधन प्रस्तावित किए जा चुके हैं। हाल ही में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विद्युत संशोधन विधेयक, 2025 का मसौदा लाया गया है, जिसे इस बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है।

ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कहा कि प्रदेश में बिजली क्षेत्र युवाओं के रोजगार का बड़ा स्रोत है। निजीकरण से रोजगार के अवसरों में भारी कमी आएगी।
तो प्रभावित होगा पेंशन भुगतान

वर्तमान में बोर्ड के कुल राजस्व का लगभग 64 प्रतिशत औद्योगिक उपभोक्ताओं से आता है। यदि यह वर्ग निजी कंपनियों के पास चला जाता है तो सरकारी बिजली कंपनी की वित्तीय स्थिति काफी प्रभावित होगी। इससे कर्मचारियों की सेवा शर्तें, पेंशन भुगतान और भविष्य की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस दौरान लोकेश ठाकुर, हीरा लाल वर्मा सहित अन्य कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया।

यह भी पढ़ें: हिमाचल प्रदेश के वित्तीय हालात पर सर्वदलीय बैठक में होगी चर्चा, खर्च कम करने के सुझावों पर कितना अमल हुआ?
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