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कानपुर के मकसूदाबाद की 80 बीघा सरकारी जमीन मुक्त, 50 करोड़ से बनेगा सिटी फारेस्ट

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जागरण संवाददाता, कानपुर। सदर तहसील के ग्राम मकसूदाबाद में करीब 110 बीघा ऊसर और बंजर सरकारी भूमि को लेकर चले लंबे विवाद के बाद अब प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम सदर अनुभव सिंह की अदालत द्वारा जमीन को पुनः सरकारी खाते में दर्ज करने के आदेश के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर दी।

गुरुवार को केडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा की गई भूमि को खाली कराया और 80 बीघा जमीन पर केडीए ने अपनी भूमि होने का सूचना बोर्ड लगा दिया। केडीए इस भूमि पर सिटी फारेस्ट विकसित करेगा। इसके लिए 50 करोड़ का बजट भी स्वीकृत हो चुका है। वहीं 80 अवैध कब्जाधारकों को खाली करने के नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं।

मकसूदाबार में करीब 110 बीघा जमीन की मौजूदा समय में करीब 160 करोड़ रुपये कीमत हैं। इस जमीन को फर्जी बैनामों के सहारे निजी संपत्ति दर्शाने की कोशिश की गई थी। जांच में सामने आया कि 60 से अधिक लोग खुद को जमीन का मालिक बताने लगे थे। इनमें कलक्ट्रेट और एसडीएम कोर्ट से जुड़े कुछ बाबुओं के रिश्तेदारों के नाम भी सामने आए हैं। जिनमें एसडीएम कोर्ट में तैनात एक स्टेनो की बेटी और एक सेवानिवृत्त बाबू के बेटे के नाम पर भी जमीन दर्ज होने की बात जांच में पाई गई है। इन कर्मियों की जांच के आदेश जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने दिए हैं।

वहीं एसडीएम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जिन दस्तावेजों के आधारों पर भूमि को निजी दिखाया गया, वे कूटरचित और अवैध हैं। खसरा, खतौनी और नामांतरण रजिस्टरों की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि जिन पट्टों का हवाला दिया गया था, वे विधिवत अभिलेखों में दर्ज ही नहीं थे। फर्जी प्रविष्टियों के जरिए सरकारी भूमि को निजी खाते में दर्ज कराने का सुनियोजित प्रयास किया गया था।

इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी सुनवाई करते हुए प्रकरण को मेरिट पर दोबारा निर्णय देने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय से कब्जाधारकों को कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद सदर तहसील और अभिलेखागार स्तर पर दस्तावेजों की दोबारा जांच की गई, जिसमें परत-दर-परत फर्जीवाड़ा उजागर होता चला गया। केडीए अब इस जमीन पर करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से सिटी फारेस्ट विकसित करने की तैयारी कर रहा है। केडीए अधिकारियों के मुताबिक ऊसर और बंजर पड़ी इस भूमि को हरित क्षेत्र में तब्दील कर शहर को पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में बड़ी सौगात दी जाएगी। सिटी फारेस्ट परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, वाकिंग ट्रैक, जल संरक्षण संरचनाएं और जैव विविधता को बढ़ावा देने वाले पौधों का रोपण किया जाएगा।

जमीन पर होते रहे कब्जे, खामोश बैठे रहे अधिकारी


  

मकसूदाबाद की सरकारी भूमि पर बीते 20 सालों से अवैध कब्जे के साथ ही जमीन खरीदने-बेचने का खेल चल रहा था। इस खेल में कलेक्ट्रेट के बाबुओं से लेकर लेखपाल तक मिले थे। जमीन पर कब्जे की शिकायतों पर अक्सर प्रशासन केडीए को कार्रवाई के पत्र भेज देता था, वहीं केडीए प्रशासन की जिम्मेदारी बताकर खुद पल्ला झाड़ लेता था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसडीएम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई शुरू की, जिसके बाद जमीन खाली करने के आदेश के साथ ही केडीए को जमीन हैंडओवर करने की कार्रवाई शुरू हुई।  

  

30 जनवरी को एसडीएम सदर की कोर्ट ने 110 बीघा भूमि को पुनः सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने पूरी जमीन केडीए को सौंप दी है। गुरूवार को केडीए की टीम ने बुलडोजर से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की है। प्रारंभिक चरण में 80 बीघा जमीन पर कब्जा लेकर सीमांकन कराया गया है। शेष भूमि पर भी चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई जारी रहेगी। जिन लोगों ने सरकारी भूमि पर आवास या अन्य निर्माण कर रखा है, ऐसे करीब 80 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया है, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।- बृजेश कुमार उपाध्याय, विशेष कार्याधिकारी, केडीए


कोर्ट के आदेश पर सभी फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कर दिया गया है और भूमि को दोबारा सरकारी खातों में दर्ज करते हुए केडीए को हैंडओवर कर दिया गया है। केडीए जमीन खाली कराने की कार्रवाई करा रहा है।- नीरज सिंह सेंगर,जिला शासकीय अधिवक्ता
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