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वृंदावन होटल अग्निकांड: आवासीय नक्शे पर बना था सिद्धि विनायक, सील; अधिकारियों पर भी गाज

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वृंदावन में उद्घाटन के दिन होटल में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी।



संवाद सूत्र, जागरण, वृंदावन। वृंदावन में बुधवार को जिस सिद्धि विनायक होटल में भीषण आग लगी। उसमें मानकों को ताक पर रख दिया गया। आवासीय में नक्शा पास कराया और फिर भूतल तथा तीन मंजिला होटल खड़ा कर दिया।

24 कमरे बना दिए और विकास प्राधिकरण के जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी, वह आंख मूंदे रहे। आग लगने के बाद जांच हुई तो प्राधिकरण की कारगुजारी सामने आई। गुरुवार को होटल में सील लगा दी गई है।

नींद से जागे प्राधिकरण के अधिकारियों ने क्षेत्र में तैनात रहे तीन अवर अभियंताओं से अब स्पष्टीकरण मांगा है। जिन्होंने होटल बनाया, उन्होंने तो अग्निशमन उपकरण लगाए और न ही अग्निशमन विभाग से एनओसी के लिए कोई आवेदन किया।

डीएम ने पूरे मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी है और 15 दिन में रिपोर्ट तलब की है। वृंदावन में रुक्मिणी विहार आवासीय क्षेत्र है। बुधवार को नवनिर्मित होटल सिद्धि विनायक का उद्घाटन होना था।

शार्ट सर्किट से दोपहर साढ़े तीन बजे आग लग गई देखते ही देखते आग ने पूरे होटल को अपनी चपेट में ले लिया। जिस वक्त होटल में आग लगी, उस वक्ता करीब 80 लोग होटल के अंदर थे और दावत की तैयारी चल रही थी।

कुछ लोगों ने आग लगने के दौरान बाहर भागकर जान बचाई, तो कुछ छतों पर चढ़ गए। घंटों फंसे रहे लोगों को होटल की छतों से क्रेन के जरिए दमकल कर्मियों ने बाहर निकाला।

इस हादसे में गोवर्धन मार्ग निवासी रमन अग्रवाल का 18 वर्षीय बेटा कार्तिक, मथुरा निवासी रिंकू का 15 वर्षीय बेटा समर्थ व राया निवासी मुकुल की 16 वर्षीय बेटी जिया व महिला कविता झुलस गईं।

हादसे के बाद विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन ने जांच कराई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। । इस होटल का नक्शा विकास प्राधिकरण ने आवासीय में पास किया था। यह नक्शा सुधा अग्रवाल, हरिओम तथा कन्हैया लाल के नाम से पास कराया गया था।

इसके बाद इसमें होटल का निर्माण कर दिया गया। नक्शा पार्किंग और तीन मंजिल में पास था, लेकिन पार्किंग के स्थान पर हाल और कमरे बना दिए गए। पूरे होटल में 24 कमरे बनाए गए। अब एमवीडीए नींद से जागा।

गुरुवार को पूरे परिसर को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-28क (1) के तहत सील कर दिया गया। इस क्षेत्र में पिछले दिनों कार्यरत रहे जेई दिनेश गुप्ता, मनोज अग्रवाल और अनिल सिंघल से स्पष्टीकरण मांगा गया।

अब सवाल यह उठता है कि होटल का निर्माण हो रहा था, तो एक-दो दिन में नहीं हुआ होगा, महीनों निर्माण में लगे होंगे। लेकिन प्राधिकरण के जिन अधिकारियों की इस निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने अपनी आंखें बंद रखीं।

नतीजा यह हुआ कि आग लगने के बाद 80 लोगों की जिंदगी मुश्किल में फंस गई। जिस वक्त होटल में आग लगी, अग्निशमन उपकरण भी नहीं थे। यहां तक कि अग्निशमन विभाग से भी एनओसी नहीं ली गई।

अब अग्निशमन विभाग भी कार्रवाई करेगा। डीएम सीपी सिंह ने पूरे मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा को दी है। 15 दिन में रिपोर्ट तलब की गई है।

यह भी पढ़ें- उद्घाटन के दौरान ही वृंदावन के होटल में लगी आग, महिला व दो बच्चे झुलसे; क्रेन से निकाले फंसे लोग
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