सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, सहरसा। परिवहन विभाग में चालक की नौकरी में फर्जी दस्तावेज देने के आरोप में न्यायिक हिरासत में बंद अभियुक्त कुंदन कुमार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चतुर्थ सहरसा अविनाश कुमार की अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए नियमित जमानत देते हुए छह माह तक मंदिर में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है।
मामला सहरसा सदर थाना कांड संख्या 1329/2025 से संबंधित है। अभियुक्त 18 नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में था। उनके विरुद्ध आरोप है कि उन्होंने परिवहन विभाग का पुलिस लाइन सहरसा में चालक की नौकरी प्राप्त करने के लिए शपथपत्र में अपने तीन आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई। प्राथमिकी के अनुसार यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज किया गया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपों के आधार पर अधिकतम अपराध झूठा शपथ पत्र देने का बनता है, जो जमानतीय अपराध है। साथ ही बताया गया कि जिन तीन आपराधिक मामलों का उल्लेख है। उनमें अभियुक्त पहले से जमानत पर है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अभियुक्त युवा है और समाज सेवा करने के लिए तैयार है।
वहीं राज्य की ओर से एपीपी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त ने झूठा हलफनामा देकर नौकरी प्राप्त करने का प्रयास किया, जबकि उसके विरुद्ध पूर्व से तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें आर्म्स एक्ट का मामला भी शामिल है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने हिरासत की अवधि, आरोप की प्रकृति तथा अभियुक्त की आयु को ध्यान में रखते हुए नियमित जमानत स्वीकृत कर ली। अदालत ने 10 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के दो जमानतदारों पर रिहाई का आदेश दिया।
साथ ही, बचाव पक्ष द्वारा समाज सेवा की इच्छा जताए जाने पर न्यायालय ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह अपने घर के निकट स्थित मत्स्यगंधा मंदिर सहरसा में अगले छह महीनों तक प्रतिदिन सुबह दो घंटे और शाम दो घंटे सेवा कार्य करेगा। इस दौरान वह मंदिर परिसर या आसपास सफाई एवं पौधारोपण जैसे कार्य करेगा। उक्त शर्तों के साथ जमानत याचिका का निस्तारण कर दिया। |
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