स्वर्गाश्रम स्थित चौरासी कुटिया में चल रहा निर्माण कार्य
जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में प्रकृति की गोद में बसी चौरासी कुटिया अगले सोलह महीने में नए रंग रूप में नजर आएगी। मूल स्वरूप में बिना कोई बदलाव किए यहां 84 ध्यान कुटिया और अन्य एतिहासिक भवनों के जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है। इसी साल जनवरी से 101 करोड़ की लागत से काम शुरू हुआ था।
ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम में गंगा किनारे से कुछ दूरी पर 70 के दशक में महर्षि महेश योगी ने वन विभाग से भूमि लीज पर लेकर शंकराचार्य नगर की स्थापना की थी। योग साधना और ध्यान के लिए यहां उन्होंने अद्भुत वास्तु शिल्प वाली 84 कुटियों का निर्माण कराया। गुफाओं के आकार में बनी इन कुटियों के बीच में ध्यान केंद्र बना हुआ है।
साधकों के रहने के लिए केंद्र में 135 गुंबदनुमा कुटिया भी हैं। अतिथियों के लिए तीन मंजिला अथिति गृह, बड़ा सभागार, महर्षि ध्यान विद्यापीठ और महर्षि का आवास बना हुआ है। 84 कुटियों और अन्य आवासों को गंगा से निकले छोटे पत्थरों से सजाया गया है।
साल 1980 में इस क्षेत्र के राजाजी नेशनल पार्क (अब राजाजी टाइगर रिजर्व) की सीमा में आने के बाद वर्ष 1985 में इसे बंद कर दिया गया था। इस कारण तीन दशक तक योग-ध्यान एवं साधना का यह केंद्र भी आम लोगों की पहुंच से दूर रहा। इन वर्षों में यह धरोहर खंडहर में तब्दील होती गई।
आठ दिसंबर 2015 को राजाजी टाइगर रिजर्व ने चौरासी कुटी को नेचर ट्रेल और बर्ड वाचिंग के लिए खोला। इसके पीछे मकसद महर्षि महेश योगी और यहां से जुड़े रहे पश्चिम के मशहूर बैंड बीटल्स ग्रुप की स्मृतियों को भी नई पहचान देना था। अब यहां मूल स्वरूप में बदलाव किए बिना काम शुरू हो गया है।
यह भी पढ़ें- चंपावत की वादियों में फिर गूंजेगी जिम कॉर्बेट की कहानियां विकास के लिए चार करोड़ जारी
यह होने हैं काम
योजना के तहत चौरासी कुटिया में कैफे, योग–ध्यान हाल, पौराणिक रसोई घर, हर्बल गार्डन, कुटियाओं, अतिथि गृह का काम होना है। कुटियाओं के अंदर नए सिरे से प्लास्टर किया जा रहा है। जो पत्थर निकल गए हैं उन्हें ठीक कराया जा रहा है। अभी यहां प्रवेश के लिए भारतीय पर्यटकों से 200 और विदेशी पर्यटकों से 1200 रुपये एंटी फीस ली जाती है।
सुबह दस बजे इसे पर्यटकों के लिए खोला जाता है। शाम साढ़े तीन बजे तक एंट्री होती है। चार बजे पर्यटकों को यहां से नहीं रुकने दिया जाता। पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रवेश और निकासी के लिए दो नए गेट, नया टिकट काउंटर, वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी होगी।
बीटल्स ने दी नई पहचान
इस स्थान को देश-दुनिया में प्रसिद्धि महर्षि महेश योगी और भावातीत ध्यान के कारण ही नहीं, इंग्लैंड के मशहूर म्यूजिकल बैंड द बीटल्स की वजह से भी नई पहचान मिली। इंग्लैंड के लिवरपूल के चार युवकों जान लेनन, पाल मैक-कार्टने, रिंगो स्ट्रार्र और जार्ज हैरिसन ने वर्ष 1960 में इस बैंड की स्थापना की थी।
16 फरवरी 1968 को ये युवक अपनी पत्नियों और महिला मित्र के साथ पहली बार ऋषिकेश महर्षि महेश योगी के ध्यान केंद्र में आए थे। नशे के आदी ये चारों युवक नशे के जरिये शांति तलाशने यहां आए थे, लेकिन यहां महर्षि के संपर्क में आने के बाद योग और अध्यात्म के अनुभव ने उनकी जिंदगी और जीने का नजरिया ही बदल डाला। करीब 45 दिन महर्षि के आश्रम में रहे बीटल्स से जुड़े ये चारों युवा \“\“फैब फोर\“\“ के नाम से मशहूर हुए।
जिस नशे के जरिये फैब फोर शांति की खोज कर रहे थे, वही अब नशे की दुनिया छोड़ योग और अध्यात्म की दुनिया में इस कदर लीन हो गए कि यहां के शांत वातावरण में उन्होंने \“\“ॐ शांति\“\“ का जाप करते हुए 48 गीतों की रचना कर डाली। इन गीतों ने व्हाइट एलबम और ऐबी रोड नामक पाश्चात्य एलबम में जगह पाकर दुनियाभर में धूम मचाई। इसके बाद इसे बीटल्स आश्रम के नाम से भी जाना जाने लगा।
चौरासी कुटिया में काम शुरू हो गया है। लोक निर्माण विभाग इसका काम कर रहा है। करीब सोलह माह काम में लगने की संभावना है।
आरसी जोशी, रेंजर गौहरी रेंज, राजाजी राष्ट्रीय पार्क |