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सांकेतित तस्वीर
संवाद सूत्र, तरैया (सारण)। तरैया थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ दिनों बाद संबंधित प्रतिवादियों को जालसाजों द्वारा फोन कर रुपये की मांग की जा रही है।
ठग खुद को कभी थाना कर्मी तो कभी एसपी कार्यालय का अधिकारी बताकर लोगों को डराने और भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। वे खर्चा-पानी, वारंट जारी होने, फाइन जमा कराने जैसे बहाने बनाकर तत्काल रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे हैं।
लोगों में दहशत का माहौल
हैरानी की बात यह है कि जिन मोबाइल नंबरों पर कॉल किए जा रहे हैं, वे वही नंबर हैं जो संबंधित प्राथमिकी में दर्ज हैं। इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर साइबर अपराधियों तक यह जानकारी कैसे पहुंच रही है। क्या कहीं डाटा लीक हो रहा है या किसी अन्य माध्यम से जानकारी हासिल की जा रही है, यह जांच का विषय बन गया है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से लोगों में दहशत का माहौल है। थाना या उच्च अधिकारी का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं और जल्दबाजी में ठगी का शिकार हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह के साइबर गिरोहों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए और प्राथमिकी से जुड़े डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
केस स्टडी – 1
पचभिंडा गांव में दो पक्षों के बीच मारपीट के बाद तरैया थाना में कांड संख्या 25/26 और 26/26 दर्ज हुई थी। कांड संख्या 25/26 के एक आरोपी के मोबाइल पर प्राथमिकी दर्ज होने के पांच दिन बाद कॉल आया। कॉलर ने खुद को थाना कर्मी बताते हुए खर्चा-पानी के नाम पर रुपये की मांग की।
आरोपी ने जब आमने-सामने मिलने की बात कही तो उसे थाना के समीप प्रखंड मुख्यालय के पास बुलाया गया। वह निर्धारित स्थान पर पहुंचा, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। बाद में आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि यह फर्जी कॉल था और वह ठगी का शिकार होने से बाल-बाल बच गया।
केस स्टडी – 2
आकुचक गांव में मारपीट की घटना के बाद कांड संख्या 32/26 और 33/26 दर्ज की गई थी। कांड संख्या 33/26 के एक आरोपी को प्राथमिकी के करीब 11 दिन बाद कॉल आया। कॉलर ने खुद को एसपी कार्यालय से बताते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज है, बेल नहीं हुई है और वारंट जारी हो चुका है।
इसके बाद छह आरोपितों पर 4200 रुपये का फाइन बताकर तुरंत जमा करने का दबाव बनाया गया। यहां तक कि फोन काटने से मना करते हुए किसी परिचित से पैसे डलवाने की बात कही गई। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह भी साइबर ठगी का प्रयास था।
थानाध्यक्ष धीरज कुमार ने स्पष्ट कहा कि पुलिस कभी भी फोन कर पैसे की मांग नहीं करती है। यदि किसी को इस तरह का काल आता है तो वह तत्काल इसकी सूचना थाना को दें। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगी। |
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