वी. राजा, बाराबंकी। जिला कारागार में कैदियों से मुलाकात की व्यवस्था अब पूरी तरह तकनीक के सहारे सुरक्षित और पारदर्शी बनाई जा रही है। वर्षों से चली आ रही हाथ में मुहर लगाने की व्यवस्था को समाप्त कर अब मुलाकातियों की पहचान फेस रीडिंग और थंब इम्प्रेशन मशीन के माध्यम से की जाएगी।
नई व्यवस्था से न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यह भी साफ-साफ दर्ज हो सकेगा कि कौन व्यक्ति किस कैदी से और कितनी बार मुलाकात करने आया।
जिला कारागार प्रशासन ने कैदियों से मुलाकात की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए आधुनिक तकनीक को शामिल किया है। अब कैदी से मिलने आने वाले प्रत्येक मुलाकाती को जेल के मुख्य द्वार पर फेस रीडिंग करानी होगी और थंब मशीन में अंगूठा लगाना अनिवार्य होगा। यही प्रक्रिया कैदी से मुलाकात कर लौटते समय भी दोहराई जाएगी।
सुरक्षा के लिए हाथ पर मुहर लगाने की व्यवस्था
अब तक जेल में मुलाकात के दौरान सुरक्षा के लिए हाथ पर मुहर लगाने की व्यवस्था थी। मुलाकाती जब जेल परिसर में प्रवेश करता था, तब उसके हाथ पर जेल की मुहर लगा दी जाती थी और बाहर निकलते समय उसी मुहर के आधार पर पहचान की जाती थी। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई बार गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी। नई डिजिटल प्रणाली से इस तरह की संभावनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
कारागार प्रशासन के अनुसार इस व्यवस्था से यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई भी मुलाकाती या कैदी बंदी रक्षकों को चकमा देकर परिसर से बाहर न निकल सके। साथ ही, रिकार्ड के रूप में यह भी दर्ज रहेगा कि किस कैदी से किस व्यक्ति ने कितनी बार मुलाकात की है।
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जिला कारागार में रविवार को छोड़कर प्रतिदिन कैदियों के परिजनों की मुलाकात कराई जाती है। सोमवार और शनिवार को सबसे अधिक भीड़ रहती है। औसतन प्रतिदिन 200 से 250 लोग अपने परिजनों से मिलने कारागार पहुंचते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों की दृष्टि से अहम मानी जा रही है।
वर्तमान में जिला कारागार में कुल 1120 कैदी बंद हैं, जिनमें 45 महिला कैदी भी शामिल हैं। सभी कैदियों को जेल की 24 बैरकों में रखा गया है।
कारागार परिसर में अब थंब मशीन और फेस रीडिंग मशीन के माध्यम से ही कैदियों के परिजनों की मुलाकात कराई जाएगी। जो भी व्यक्ति मिलने आएगा, उसे इस प्रक्रिया को पूर्ण करना होगा। यह व्यवस्था सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पारदर्शिता भी बढ़ाएगी और यह जानकारी भी उपलब्ध रहेगी कि कौन व्यक्ति कितनी बार कैदी से मिलने आया। - कुंदन कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार, बाराबंकी |
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