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सुकून, सुंदरता और रोमांच का संगम है मालवा-निमाड़, यहां मुस्कुराती है प्रकृति और बोलता है इतिहास

Chikheang 4 hour(s) ago views 129
  

मांडू के किले और महल सुनहरे अतीत की कहानी कहते हैं



प्रदीप दीक्षित, इंदौर। मध्य प्रदेश का मालवा-निमाड़ क्षेत्र आपको कश्मीर या शिमला की तरह सुकून, सुंदरता और वही रोमांच देता है, वह भी किफायती खर्च के साथ।

यहां न कड़ाके की ठंड है, न चुभती गर्मी। आसमान की लालिमा, पानी की शीतलता, घाटों की लय, किलों की शिल्पकला और नदी के बीच रोमांच- सब कुछ एक ही सफर में मिल जाता है।

  
पहला पड़ाव
मांडू: सुनहरे अतीत में ले जाते हैं किले और महल आपको

धार जिले की पर्यटन नगरी मांडू को यूं ही सिटी आफ जाय नहीं कहा जाता। यहां के किले और महल आपको सुनहरे अतीत में ले जाते हैं। पत्थरों पर उकेरी शिल्पकला, आसपास फैली हरियाली और पहाड़ी हवा - सब मिलकर अनुभव को खास बनाते हैं। सर्दियों में मांडू की पहचान और भी निखर जाती है।

हल्की धूप चेहरे को सहलाती है, ठंडी हवा किलों की दीवारों से टकराकर बीते दौर की कहानियां सुनाती है और चारों ओर फैली हरियाली सफर को सुकून में बदल देती है। परमार शासकों से लेकर मालवा सल्तनत तक फैला मांडू का इतिहास यहां की हर इमारत में दर्ज है।

  

दो तालाबों के बीच बना जहाज महल पानी में तैरते जहाज जैसा आभास देता है, तो रानी रूपमती महल से दिखती नर्मदा घाटी प्रेम और त्याग की कथा को जीवंत कर देती है। हिंडोला महल की झुकी दीवारें और जामा मस्जिद की भव्यता मांडू की सांस्कृतिक समृद्धि का एहसास कराती हैं।

  • अवश्य देखें : जहाज महल, रानी रूपमती महल, हिंडोला महल, बाग गुफाएं।
  • ऐसे पहुंचें : नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर (लगभग 100 किमी)। इंदौर से बस/टैक्सी सुविधाजनक। रेल से रतलाम या इंदौर होकर पहुंचा जा सकता है।
  • ठहरने की व्यवस्थाः मांडू में पर्यटकों के ठहरने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म के मालवा रिजार्ट व मालवा रिट्रीट सहित निजी होटल, गेस्ट हाउस और होमस्टे उपलब्ध हैं। सीजन में अग्रिम बुकिंग जरूरी रहती है।
  • विशेषता: शांत वातावरण लुभाता है। फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त जगह।
  
मांडू के बाद धार की भोजशाला - ज्ञान और विरासत

मांडू से लौटते समय धार में भोजशाला का दर्शन ठहरकर करें। मां वाग्देवी सरस्वती से जुड़ा यह स्थल ज्ञान, इतिहास और आस्था का संगम है। यहां की विरासत को समझना जरूरी है।

यहां कम समय में गहरी अनुभूति होती है। भोजशाला सिर्फ एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि वह जगह है, जहां खड़े होते ही भारतीय ज्ञान परंपरा की गूंज महसूस होने लगती है।

  

मां वाग्देवी सरस्वती से जुड़ी यह धरोहर सदियों तक विद्या, वाणी और शास्त्रों की साधना का केंद्र रही है। इतिहासकारों के अनुसार, भोजशाला का संबंध परमार शासक राजा भोज से जुड़ता है, जिन्हें ज्ञान और साहित्य का महान संरक्षक माना जाता है।

इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े यात्रियों के लिए भोजशाला एक ऐसा ठहराव है, जहां मालवा की विरासत को महसूस किया जा सकता है। पढ़ा नहीं जाता, जिया जाता है।

  
दूसरा पड़ाव
महेश्वर: आकर्षित करती है नर्मदा की शांति

खरगोन जिले का महेश्वर आध्यात्मिक ऊर्जा और सौंदर्य का पता देता है। नर्मदा घाटों पर उठती लहरें, कलात्मक मंदिर और किला - सब मन को मोह लेते हैं। पवित्र महेश्वर नर्मदा नदी के तट पर बसा वह नगर है, जहां इतिहास, अध्यात्म और जीवन की सहज लय एक साथ बहती नजर आती है।

नर्मदा का विस्तार, घाटों की सीढ़ियां और पत्थरों में दर्ज सदियों पुरानी स्मृतियां यात्रियों का स्वागत करती हैं। प्राचीन काल में महिष्मती कहलाने वाला यह नगर रामायण–महाभारत में वर्णित है और राजा कार्तवीर्य अर्जुन की राजधानी रहा है।

  

18वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होलकर ने इसे अपनी राजधानी बनाकर मंदिरों, घाटों और जनकल्याणकारी कार्यों से पुनर्जीवित किया था। उन्हीं की छाया में खड़ा अहिल्याबाई किला नर्मदा की ओर खुलता है, जहां सुबह और शाम की आरती मन को ठहराव देती है।महेश्वर का बौद्धिक गौरव भी कम नहीं है।

परंपरा के अनुसार यहीं आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र का ऐतिहासिक शास्त्रार्थ हुआ, जिसकी निर्णायक उभय भारती बनीं। यह कथा नगर को केवल तीर्थ नहीं, विचारों की भूमि भी बनाती है।

  

हथकरघा की खनक यहां की पहचान है। पांचवीं शताब्दी से बुनाई का केंद्र रहे महेश्वर की महेश्वरी साड़ियां सादगी और शाहीपन का अद्भुत संगम हैं।

  • अवश्य देखें: अहिल्याबाई किला, घाटों की संध्या आरती, प्राचीन मंदिर।
  • ऐसे पहुंचे: इंदौर से लगभग 90 किमी। बस/टैक्सी सहज उपलब्ध।
  • ठहरने की व्यवस्थाः महेश्वर में पर्यटकों के ठहरने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म का नर्मदा रिट्रीट, ऐतिहासिक अहिल्या फोर्ट हेरिटेज होटल, निजी होटल, लाज और होमस्टे उपलब्ध हैं। नर्मदा तट के आसपास बजट से लेकर प्रीमियम ठहराव की सुविधा मिलती है।
  • विशेषता : शाम की आरती और घाटों की शांति लुभाती है।
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