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पलवल के छांयसा में हेपेटाइटिस का कहर, 15 दिनों में कई मौतें; ग्रामीणों में दहशत का माहौल

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ग्रामीणों के टेस्ट करते हुए स्वास्थ्य कर्मी। जागरण






कुलवीर चौहान, जागरण। हथीन जिले के छांयसा गांव में कुछ ही दिनों में 12 से ज्यादा लोगों की मौत से दहशत फैल गई है। इनमें से ज्यादातर मौतें हेपेटाइटिस की वजह से बताई जा रही हैं। 5,000 से ज्यादा की आबादी वाले गांव में बुखार भी तेज़ी से फैल रहा है, जिससे गांव वाले डरे हुए हैं।

बुधवार को हेपेटाइटिस B और C से पीड़ित 20 साल के दिलशाद की मौत हो गई। मौतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को गांव में कैंप लगाकर टेस्ट किए और लोगों को जागरूक किया। इस दौरान, बुखार के कई मरीज़ों को इलाज के लिए एम्बुलेंस से जिला सिविल हॉस्पिटल भेजा गया।
15 दिनों से मौतों का सिलसिला जारी

गौरतलब है कि गांव में पिछले 15 दिनों से बुखार से मौतों का सिलसिला जारी है। शुरू में तो गांव वालों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जैसे-जैसे मौतों का आंकड़ा बढ़ा, वे घबरा गए। गांव वालों के मुताबिक, अकेले पिछले 15 दिनों में 12 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर को हल्के से तेज़ बुखार, थकान, पीलिया और पेट दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद अचानक उनकी मौत हो गई।

  

ग्रामीणों के बीच दवाओं का वितरण करते हुए स्वास्थ्य कर्मी- विभाग

गांव में 11 साल के हुफैज, 14 साल की सारिका, 16 साल की हुमा, 20 साल के दिलशाद, 42 साल के शमसुद्दीन, 67 साल की जमीला, 71 साल की आशिया, 75 साल की इंद्रावती और हसन, 8 साल की पायल, 25 साल के हब्बू और 69 साल के नासिर की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट हरकत में आया और जांच के लिए गांव में टीमें भेजीं। बुधवार को 20 साल के दिलशाद की मौत के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट अलर्ट हो गया और शुक्रवार को गांव में कैंप लगाया गया।

हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में कन्फर्म हुआ कि सात मौतें हेपेटाइटिस की वजह से हुई हैं। हुफैज (11), सारिका (14), हुमा (16), दिलशाद (20), शमसुद्दीन (42), जमीला (67) और सरफराज की मौत हेपेटाइटिस से हुई। बुधवार को इलाज के दौरान मरने वाले दिलशाद का हेपेटाइटिस B और C टेस्ट भी पॉजिटिव आया था।

  

जिला नागरिक अस्पताल उपचार के लिए पहुंचा छांयसा गांव का बुखार से पीड़ित परिवार- जागरण

इसके अलावा, जांच में हेपेटाइटिस B के दो और हेपेटाइटिस C के पांच मामले मिले हैं, और इलाज चल रहा है। हालांकि, हेल्थ डिपार्टमेंट गांव में हुई दूसरी मौतों की वजह बुढ़ापे और दूसरी बीमारियां बता रहा है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने लेप्टोस्पायरोसिस के लिए भी टेस्ट किए, लेकिन किसी में भी कन्फर्म नहीं हुआ।
छांयसा गांव में गंदा पानी

पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की जांच में भी कई घरों में गंदा पानी मिला। जांच रिपोर्ट में छह घरों के पानी में E. कोलाई बैक्टीरिया मिला। गांव के पांच पानी के सोर्स में भी बैक्टीरिया कन्फर्म हुआ। जांच में गांव के पानी में क्लोरीन की कमी भी सामने आई। हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने गांव वालों को साफ पानी पीने की सलाह दी है। शुक्रवार को गांव में एक टेस्टिंग कैंप भी लगाया गया, और संभावित मरीजों को इलाज के लिए जिला सिविल अस्पताल भेजा गया।

हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने पाया है कि गांव के कई जवान लड़के दूर से ड्राइवर का काम करते हैं। गांव के कई ट्रक ड्राइवरों का हेपेटाइटिस टेस्ट पॉजिटिव आया है। शक है कि यह बीमारी खराब खून और ड्रग्स के लिए खराब सुइयों के इस्तेमाल की वजह से हुई। फिर यह बीमारी उनके परिवारों में फैल गई।

जांच टीम को लीड कर रहे डॉ. मंजीत के मुताबिक, गांव में ज़्यादातर मौतें हेपेटाइटिस B और C की वजह से हुईं। हेल्थ डिपार्टमेंट की टीमें घर-घर जाकर टेस्टिंग कर रही हैं। हेपेटाइटिस B और C वायरस से होने वाले गंभीर लिवर इन्फेक्शन हैं। इसके मुख्य कारणों में अनप्रोटेक्टेड सेक्स, खराब सुइयों का इस्तेमाल और जन्म के समय मां से बच्चे में इन्फेक्शन शामिल हैं। कुछ मरीज़ों की पहचान भी की गई है और उन्हें इलाज के लिए डिस्ट्रिक्ट सिविल हॉस्पिटल भेजा गया है।

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