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कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा के केंद्रापाड़ा जिले के एक आंगनबाड़ी केंद्र में कथित जातिगत भेदभाव का मामला शुक्रवार को राज्यसभा में गूंज उठा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए इसे संविधान के मूल्यों पर सीधा प्रहार बताया।
खड़गे ने कहा कि केंद्रापाड़ा जिले के राजनगर ब्लॉक स्थित नुआगांव आंगनबाड़ी केंद्र में एक दलित महिला को हेल्पर-कुक के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद से कुछ ग्रामीणों ने अपने बच्चों को केंद्र भेजना बंद कर दिया है। आरोप है कि तीन माह से अधिक समय से बच्चे वहां नहीं जा रहे, जिससे उनके पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने सदन में कहा कि 21वीं सदी में भी यदि किसी दलित महिला द्वारा पकाया गया भोजन बच्चों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है तो यह सामाजिक समरसता पर गंभीर सवाल है। खड़गे ने इसे कार्यस्थल पर जातिगत भेदभाव करार देते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 की भावना के विरुद्ध है।
नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य से जुड़ी योजनाओं को सामाजिक पूर्वाग्रहों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।
उधर, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। प्रशासन का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप की गई थी। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर आंगनबाड़ी केंद्र को पुनः सुचारु रूप से संचालित करने का प्रयास शुरू किया है।
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर प्रश्न बता रहा है, जबकि प्रशासन समाधान का आश्वासन दे रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कदम उठाती है। |
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