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संजय कृष्ण, रांची। सरकारी शिक्षा भगवान भरोसे चल रही है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा का हाल यही है। बिहार से अलग होने के बाद भी झारखंड में उच्च शिक्षक प्रोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। प्रोन्नति न होने के कारण अनुत्साह की भावना भर गई है। इसका सीधा अधर शिक्षा और छात्रों पर भी पड़ता है।
बिहार में यहां से पढ़े छात्र नौकरी पाकर प्रोन्नति हो गए, लेकिन जिनसे वे पढ़े वे वहीं हैं। प्रोन्नति के लिए झारखंड में शिक्षकों को संघर्ष करना पड़ रहा है। राज्य में लगभग दो सौ शिक्षक प्रोन्नति की बाट देख रहे हैं।
झारखंड यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जुटान) ने इसको लेकर संघर्ष शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि 2018 के बाद नियुक्त शिक्षकों की प्रोन्नति लटकी हुई है। हमने विभाग से मांग की है कि सभी शिक्षकों के वेतन निर्धारण का कार्य शीघ्रतिशीघ्र संपन्न किया जाए। 2018 के रेगुलेशन के तहत सभी योग्य या पात्र शिक्षकों को अगले लेवल पर प्रोन्नत करने की अधिसूचना जारी किया जाएगा।
शिक्षकों ने कहा कि 2018 के रेगुलेशन के अनुसार राज्य के कई शिक्षक पूरी अर्हता के बाद भी प्रोन्नति की प्रक्रिया की बाट दो वर्षों से जोह रहे हैं। शिक्षकों ने हमारी उचित मांगों को एचआरडी या विवि स्तर पर ही साध लिया जाए। हर बात पर शिक्षकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़े यह अच्छे संकेत नहीं देता। शिक्षक यहां पढ़ाने के लिए आया है न कि मुकदमा लड़ने के लिए। विभाग और विवि दोनों को सोचना चाहिए।
अध्यक्ष जगदीश लोहरा ने कहा कि जिन शिक्षकों की प्रोन्नति 2023 में संपन्न हो जानी चाहिए थी, उनकी प्रोन्नति की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। शिक्षकों का कहना है कि पीएचडी करने के बाद सेवा में आए शिक्षकों की प्रोन्नति 4 वर्षों के बाद और बिना पीएचडी के सेवा में आए शिक्षकों की प्रोन्नति 6 वर्षों में होनी चाहिए। |
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