जागरण संवाददाता, बरेली। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज के लिए जिले में ट्रामा सेंटर के संचालन के प्रयास के दावे किए जा रहे हैं लेकिन जिला अस्पताल में दो साल पहले बनकर तैयार हुई कम्पेहैंसिव मेडिकल, सर्जिकल एंड एक्सीडेंटल इमरजेंसी यूनिट यानी ट्रामा विंग का ही संचालन नहीं हो सका है। डाक्टरों की तैनाती न होने के साथ अब तक आक्सीजन सप्लाई के साथ फायर सिस्टम भी चालू नहीं हो सका है।
यहां तक कि हैंडओवर को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। सीएमओ डा. विश्राम सिंह का कहना है कि यूनिट को जिला अस्पताल की पूर्व एडीएसआइसी डा. अल्का शर्मा के समय हैंडओवर किया जा चुका है जबकि एडीएसआइसी डा. अजय मोहन अग्रवाल का कहना है कि अब तक यूनिट हैंडओवर नहीं हुई है। यूनिट के संचालन के लिए पत्राचार भी किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के सड़क के दूसरी ओर परिसर में एक्सीडेंटल इमरजेंसी यूनिट बनाई गई है। करीब चार करोड़ में भवन बनकर तैयार हुआ है। अंदर कुछ सामान भी रखा गया है। दो साल पहले यूनिट बनकर तैयार हो चुकी है लेकिन इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। यहां आक्सीजन सप्लाई के ही इंतजाम पूरे नहीं हो सके हैं।
इसकी प्रमुख वजह है कि अस्पताल में जो आक्सीजन प्लांट लगाया गया है, वह परिसर के एक तरफ है और यूनिट सड़क के दूसरी तरफ है। प्लांट से आक्सीजन की पाइप लाइन यूनिट तक अंडरग्राउंड लाइन बिछाकर ही जा सकती है। इसके लिए दुकानें भी आड़े आ रही हैं। इसके बावजूद प्लांट से आक्सीजन की सप्लाई सिलिंडर के माध्यम से की जा सकती है लेकिन यूनिट में आक्सीजन सप्लाई के लिए लगने वाले उपकरण ही नहीं लगाए गए हैं।
इसके अलावा आग से बचाव के पूरे इंतजाम भी नहीं किए गए हैं, जिसकी वजह से फायर विभाग की एनओसी भी नहीं मिल रही है। सीएमओ डा. विश्राम सिंह का कहना है कि यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी अब जिला अस्पताल की है, क्योंकि इसे हैंडओवर किया जा चुका है जबकि एडीएसआइसी डा. अजय मोहन अग्रवाल का कहना है कि अभी यूनिट हैंडओवर ही नहीं हुई है। इसके अलावा यहां इंतजाम अधूरे हैं।
इमरजेंसी के तरह यूनिट भी परिसर के काफी अंदर
किसी भी अस्पताल में इमरजेंसी परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास ही होती है ताकि मरीज आसानी से पहुंच सकें लेकिन जिला अस्पताल में ऐसा नहीं है। यहां मुख्य प्रवेश द्वार से प्रवेश करने के बाद एंबुलेंस को दो तीन राउंड घूमकर इमरजेंसी तक जाना पड़ता है। कुछ दिनों पहले मुख्यालय से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर इमरजेंसी न होने पर चिंता जताई थी।
इमरजेंसी की तरह एक्सीडेंटल इमरजेंसी यूनिट भी अस्पताल के दूसरे परिसर में काफी अंदर बनाई गई है। यहां भी एंबुलेंस दो जगह मुड़कर ही पहुंचेगी। यूनिट भी पानी की टंकी के पीछे बनाई गई है।
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