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UP Lift Rules 2024: अब बिना पंजीकरण लिफ्ट चलाना पड़ेगा भारी, रोज देना होगा ₹500 तक का दंड

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ट्यूलिप ग्रेस में लगी लिफ्ट। जागरण



कमलेश शर्मा, बरेली। सिस्टम की अति उदारता कहें कि पूंजीपतियों की मनमानी, लिफ्ट और एस्केलेटर लगवाने में नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियम यह है कि पंजीकरण के बाद ही इसका संचालन किया जा सकता है। बिना पंजीकरण के चलाने पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना और महीनाभर बाद बंद कराकर जुर्माना वसूलने का प्राविधान है, लेकिन अधिकांश लोग इसकी अनदेखी कर रहे हैं।

शहर में 500 लिफ्ट, एस्केलेटर संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन पंजीकरण सिर्फ 15 लोगों ने कराया है। विद्युत सुरक्षा विभाग की कोई सख्ती भी नहीं दिखी है, लेकिन अब अभियान चलाकर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, होटलों, फैक्ट्री और कोठियों में लिफ्ट का चलन तेजी से बढ़ा है। लिफ्ट और एस्केलेटर लगवाने के लिए प्रदेश सरकार ने विस्तृत गाइड लाइन बनाई है।
सरकारी कार्यालय में न‍िश्‍शुल्‍क होता है पंजीकरण

सरकारी कार्यालयों में लगने वाली लिफ्ट, एस्केलेटर का पंजीकरण निश्शुल्क होता है, लेकिन निजी संस्थानों में लगने वाली लिफ्ट पर 5,000 रुपये शुल्क जमा कर पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। विद्युत सुरक्षा विभाग की वेबसाइट updeslift.org पर आनलाइन पंजीकरण कराया जा सकता है।

  

किसी भी सार्वजनिक परिसर में कम से कम एक लिफ्ट अनिवार्य रूप से ऐसी होनी चाहिए जो नि:शक्त अनुकूल हो और इस संबंध में संहिताओं और निर्देशों के अनुरूप हो। प्रतिष्ठान स्वामी को अनिवार्य रूप से ओइएम या उसके प्राधिकृत सेवा प्रदाता से व्यापक एएमसी लेनी होगी। लिफ्ट और एस्केलेटर का वार्षिक अनुरक्षण के लिए 25,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
प्रश‍िक्ष‍ित आपरेटर न‍ियुक्‍त करना जरूरी

हर लिफ्ट पर प्रशिक्षित आपरेटर नियुक्त करना आवश्यक किया गया है। उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर नियमावली, 2024 में विस्तृत गाइड लाइन जारी की गई है, लेकिन धरातल पर इसका पालन नहीं हो रहा है। शहर के प्रेमनगर सलेक्शन प्वांइट स्थित फ्लैशबैक रेस्टोरेंट की लिफ्ट में पिछले सप्ताह छह बच्चों समेत 10 लोग फंस गए थे। लिफ्ट तेजी से तीसरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर आकर गिरी तो बच्चों की चीख-पुकार मच गई थी। लिफ्ट का दरवाजा तोड़कर सभी को बाहर निकाला गया था। इस प्रकरण में कोई जांच-पड़ताल तक नहीं की गई।
नियमों की अवहेलना पर कार्रवाई का प्रावधान

उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर नियमावली के अनुसार पंजीकरण कराकर ही लिफ्ट, एस्केलेटर का संचालन करना चाहिए। पंजीकरण कराने में सात दिन का विलंब होने पर 100 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त शुल्क, इसके बाद 15 दिन तक का विलंब होने पर प्रतिदिन 200 रुपये विलंब शुल्क दे सकते हैं।

वहीं 30 दिन तक विलंब होने पर 500 रुपये प्रतिदिन विलंब शुल्क जबकि 30 दिन से अधिक पंजीकरण नहीं कराने पर लिफ्ट या एस्केलेटर का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कराने का नियम है। 10 हजार रुपये का जुर्माना और विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण कराने पर ही संचालन कराया जा सकता है।

  


विद्युत सुरक्षा की जांच कराने, लिफ्ट-एस्केलेटर का पंजीकरण कराने के संबंध में फैक्ट्री संचालक, होटल संचालक, उद्यमियों को नोटिस जारी किए गए हैं। जल्द ही जिलेभर में अभियान चलाकर जांच की जाएगी। बिना पंजीकरण चलते मिलने पर लिफ्ट का संचालन बंद कराया जाएगा। प्रतिष्ठान स्वामियों से जुर्माना भी वसूल किया जाएगा। नियमों का पालन करने वालों को ही संचालन की अनुमति दी जाएगी।

- निर्भय सिंह, सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा





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