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पंजाब में आउटसोर्स पर काम कर रहे चौकीदार होंगे पक्के, हाईकोर्ट का आदेश, पिछले सेवा लाभ भी मिलेंगे

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वर्ष 2008 से विभिन्न विभागों में चौकीदार के रूप में कार्य कर रहे हैं।



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब में वर्षों से आउटसोर्स पर कार्यरत चौकीदारों को अब पक्की नौकरी मिलेगी। पिछले सेवा लाभ भी मिलेंगे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चौकीदारों केा नियमित करने का आदेश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक निरंतर सेवाएं लेने के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी दर्जे में रखना अनुचित श्रम प्रथा है और यह संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने मनक सिंह व अन्य समेत कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों की नियमितीकरण संबंधी मांग को 15 अक्टूबर 2020 के आदेश के जरिए खारिज करना कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे वर्ष 2008 से विभिन्न विभागों में चौकीदार के रूप में कार्य कर रहे हैं और वास्तविक नियंत्रण विभाग का ही है, जबकि उन्हें ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त दिखाया गया है।

उन्होंने समान कार्य के बदले समान वेतन, न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण की मांग करते हुए कहा कि उनसे वही काम लिया जाता है जो नियमित कर्मचारियों से लिया जाता है।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि विभाग प्रति कर्मचारी लगभग 14 हजार रुपये ठेकेदार को देता था, लेकिन कर्मचारियों को इससे काफी कम वेतन मिलता था, जिससे वे न्यूनतम वेतन से भी नीचे रह जाते थे।

अदालत ने इस स्थिति को अनुचित बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के समान कार्य के बदले समान वेतन संबंधी फैसलों का हवाला दिया और कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब कर्मचारी लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे हों और उनका कार्य स्थायी प्रकृति का हो, तो उन्हें केवल आउटसोर्स या अस्थायी श्रेणी में रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 की भावना के विपरीत है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सरकारी विभाग वर्षों तक अस्थायी श्रम लेकर बाद में नियमितीकरण से इनकार नहीं कर सकते।

अंतिम आदेश में अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने से छह सप्ताह के भीतर सभी याचिकाकर्ताओं को नियमित किया जाए। यदि तय समय में आदेश का पालन नहीं किया गया तो कर्मचारियों को स्वतः नियमित माना जाएगा। साथ ही अदालत ने कहा कि कर्मचारियों की पूर्व सेवा अवधि भी गणना में शामिल कर उन्हें सभी संबंधित सेवा लाभ दिए जाएं।

इस फैसले को राज्य में आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे समान परिस्थितियों में कार्यरत अन्य कर्मचारियों को भी न्यायिक राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है।
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