हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रतीकात्मक फोटो
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट शुरू गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पहले चुनाव करवाने के आदेश जारी किए हैं। इसके बाद गांव की सरकार (पंचायत) व स्थानीय निकाय चुनाव के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। अभी मतदाता सूचियों की प्रिंटिंग का काम आठ जिलों में पूरा हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग जिला उपायुक्तों को सीमाओं के पुनर्गठन व आरक्षण रोस्टर को लेकर निर्देश जारी करेगा। एक दो दिनों के भीतर ही ये आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
पहले 28 फरवरी का आदेश था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मार्च तक रोस्टर जारी करना होगा।
प्रिंटिंग व पंचायत पुर्नगठन की प्रक्रिया जारी
प्रदेश के आठ जिला उपायुक्तों ने मतदाता सूचियों की वार्ड आधार पर बीस-बीस कॉपियों की छपाई का काम पूरा किया है। अभी चार जिलों में यह कार्य जारी है। राज्य मंत्रिमंडल ने पंचायतों के पुनर्गठन की भी मंजूरी दी थी। इसकी भी प्रक्रिया चली हुई है। सूत्रों की मानें तो बजट सत्र समाप्त होने के बाद ही पंचायत चुनाव का ऐलान संभव है।
सरकार करेगी गांव का रुख
16 फरवरी से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। इस बार बजट सत्र तीन चरणों में होगा ऐसी संभावना है। सरकार का पूरा ध्यान अभी बजट सत्र पर है। सत्र के बाद सरकार चुनावी मोड में आ जाएगी। हालांकि राज्य सरकार ने पहले ही सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम शुरू किया हुआ है। सत्र के बाद इस कार्यक्रम को और तेज किया जाएगा।
कैबिनेट मंत्रियों व वरिष्ठ विधायकों की ड्यूटियां लगाई जाएंगी, ताकि पंचायत स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन कर जनता की समस्याओं को सुना जा सके व उसका निपटारा किया जा सके।
चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं, फिर भी कुर्सी पर रहती है निगाह
पंचायत चुनाव भले ही पार्टी चिह्न पर नहीं होते। जिला परिषद चेयरमैन, नगर निकायों के अध्यक्ष की कुर्सी पर राजनीतिक दल अपने करीबी को बिठाना चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी भी कह चुकी है कि पार्टी के जो सक्रिय कार्यकर्ता है उन्हें स्थानीय निकाय चुनाव में उतारा जाएगा।
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