बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश का हालिया बजट केवल वित्तीय आवंटन का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह राज्य को $1$ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक सोची-समझी कार्ययोजना का प्रतिबिंब है। इस बजट में बुनियादी ढांचे के विकास, लघु उद्योगों (MSME) को प्रोत्साहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
आर्थिक जगत के दिग्गज विशेषज्ञों ने बजट के विभिन्न पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऋण गारंटी योजनाओं में सुधार और औद्योगिक क्लस्टर्स का विस्तार न केवल निवेश को आकर्षित करेगा, बल्कि प्रदेश में रोजगार के नए क्षितिज भी खोलेगा। आइए जानते हैं, अर्थशास्त्रियों की नजर में यह बजट उत्तर प्रदेश के भविष्य को कैसे आकार देगा।
बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय
- बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह बीते साल से 19 प्रतिशत अधिक है। इससे उत्तर प्रदेश के नए उद्यमियों को काफी संबल मिलेगा। बजट में ऋण गारंटी को लेकर बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे बड़ी जमानत के बिना भी छोटे उद्यमियों को ऋण लेने में आसानी होगी।
शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ
- उत्तर प्रदेश के बजट में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक धनराशि है। अब ₹27,103 करोड़ तय किए गए हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के जरिये सरकार लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन कर रही है।
प्रो मेनका सिंह, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी
- देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेन्ट्स इकाइयां प्रदेश में स्थित हैं। प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस बार के बजट में इस क्षेत्र को बढ़ाना देने के ज्यादा धन दिया गया है।
प्रो दीप्ति तनेजा, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी |