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2030 तक 10 लाख करोड़ का हो जाएगा झारखंड का बजट, डॉ. ज्योति प्रकाश ने दिए विकास के सुझाव

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2030 तक 10 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा राज्य बजट : डॉ. ज्योति प्रकाश



जागरण संवाददाता, रांची। दैनिक जागरण कार्यालय के सभागार में आयोजित जागरण विमर्श कार्यक्रम में रांची यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट आफ इकोनामिक्स के एचओडी डॉ. ज्योति प्रकाश शामिल हुए। उन्होंने राज्य बजट पर न सिर्फ अपने विचार प्रकट किए बल्कि राजस्व वृद्धि को ले कई सुझाव भी दिए और पूछे गए सवालों का जवाब भी दिया।

चर्चा के क्रम में उन्होंने बताया कि राज्य बजट का आकार आगामी दिनों दोगुना हो जाएगा। वर्तमान में 5.6 लाख करोड़ से वर्ष 2030 तक बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं कि राज्य में विकास कार्य हो रहे हैं और सर्विस व उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि भी हुई है। हालांकि, इससे इतर राज्य बजट को और बेहतर बनाने की दिशा में कई संशोधन की गुंजाइश है।

झारखंड राज्य मिनरल्स बेस्ड इकोनामी है, यहां बेरोजगारी दूर करने के साथ साथ मानवीय विकास की दिशा में कई कदम उठाने की दरकार है। यहां प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना होगा, यह तब संभव है जब बजट संतुलित होगा। बजट में पूंजी गहन उद्योग से अधिक श्रम प्रधान उद्योग को बढ़ावा देना होगा ताकि राज्य में रोजगार के अवसर बढ़े और पलायन रूके। जितने संसाधन हैं उन्हें सामाजिक-आर्थिक वृद्धि की दिशा में मोड़ना होगा। एमएसएमई को बढ़ावा देना होगा और श्रम संसाधन को कौशलयुक्त करना होगा।
छोटे एवं लघु उद्योगों को मिले प्राथमिकता

बजट में छोटे एवं लघु उद्योगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। राज्य के ग्रामीण क्षेत्राें में कई ऐसे उद्यम हैं जो लोग स्वयं अपने स्तर से ही निष्पादित करते हैं, यदि इन श्रमिकों को सही प्लेटफार्म मिले तो राज्य की पहचान राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सकती है। इंडस्ट्रियल कारिडोर को तैयार करने की दिशा में भी कदम उठाना होगा। राज्य में टैक्सटाइल, लाह, तेलहन, मिलेट्स से बने पदार्थ के साथ साथ ग्रीन फ्यूल बनाने की दिशा में भी कार्य करना होगा।

एग्री बेस्ड इकोनामी में भी राज्य बेहतर कर सकता है और एग्रीकल्चर के क्षेत्र में भी यहां अपार संभावनाएं हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 26 प्रतिशत ट्राइबल पापुलेशन है। इनमें महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक सक्रिय हैं। इस जनसंख्या को पाटने की आवश्यकता है, ग्रामीण क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योग के साथ साथ एग्रीकल्चर बेस्ड वर्कफोर्स तैयार करना होगा, इनके लिए पर्याप्त बाजार और पूंजी तैयार करना होगा। तब ही, समानांतर रूप से बजट का सदुपयोग संभव है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बढ़ाना होगा इनकम सोर्स

बजट में इसका प्रविधान हो कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का इनकम सोर्स किस तरह बढ़े। फारेस्ट राइट के साथ साथ फारेस्ट प्रोडक्ट, मिलेट्स की खेती को बढ़ावा और अच्छा बाजार, रीन्यूएबल एनर्जी को ग्रामीण क्षेत्रों में यदि बढ़ावा मिलेगा तो इसका सीधा लाभ शहरी क्षेत्रों को भी होगा। इसके अलावा, शिक्षा, स्वास्थ्य, टेली मेडिसीन, स्वास्थ्य केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण सुविधा, माइनिंग टूरिज्म को बढ़ावा, फासिल फ्यूल के खनन को सीमित करना, हायर एजुकेशन में सुधार की दिशा में सार्थक प्रयास करने होंगे।
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