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अमावस्या और ग्रहण का महासंयोग, आपकी एक गलती पड़ सकती है भारी, जानें क्या कहता है ज्योतिषशास्त्र

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फाल्गुन अमावस्या और अमावस्या पर रखें इन बातों का ध्यान (Image Source: Freepik)



दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। हिंदू धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है, लेकिन इस साल 17 फरवरी 2026 को पड़ने वाली यह अमावस्या बहुत ही खास होने जा रही है। इस दिन अमावस्या के साथ-साथ सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।

ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या को पितरों की शांति के लिए उत्तम माना जाता है, वहीं ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से ऊर्जा के भारी बदलाव का समय माना जाता है। जब ये दोनों एक साथ होते हैं, तो दान-पुण्य और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि इस महत्वपूर्ण दिन पर आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।
फाल्गुन अमावस्या और सूर्य ग्रहण का प्रभाव

फाल्गुन मास की अमावस्या अध्यात्म और शुद्धि का दिन होती है। इस बार ग्रहण का साया होने के कारण ऊर्जा का प्रवाह काफी अलग होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा का प्रभाव हर इंसान पर पड़ता है, इसलिए इस दिन मानसिक शांति बनाए रखना बहुत जरूरी है। यह समय आत्म-मंथन और पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए सबसे उत्तम है।

अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से घर में सुख-शांति आती है। ग्रहण के इस विशेष संयोग में की गई प्रार्थना न केवल ग्रह दोषों को शांत करती है, बल्कि जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की संभावना भी बढ़ाती है।
अमावस्या पर दान महत्व

अमावस्या और ग्रहण के इस संयोग पर दान का सबसे अधिक महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को तिल, अनाज, वस्त्र या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ग्रहण काल के दौरान और अमावस्या पर अपने इष्ट देव के मंत्रों का मानसिक जाप करते रहें।

  

पितरों की शांति के लिए गीता का पाठ करना या \“ॐ पितृभ्यः नमः\“ मंत्र का जाप करना फलदायी होता है। घर में शुद्धता बनाए रखें और ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। यह समय पुरानी नकारात्मकता को छोड़कर नई और सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने का एक बेहतरीन अवसर है।
क्या न करें: इन गलतियों से बचें

इस दिन कुछ बातों का विशेष परहेज करना चाहिए ताकि ग्रहण और अमावस्या का नकारात्मक प्रभाव आप पर न पड़े। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दौरान किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन या नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें। ग्रहण के समय भोजन पकाने या खाने से बचना चाहिए यदि जरूरी हो तो भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें। अमावस्या के दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत या बड़े निवेश करने से बचना बेहतर होता है। मन में क्रोध, ईर्ष्या या किसी के प्रति बुरे विचार न लाएं, क्योंकि इस समय की गई मानसिक गलतियां आपके आत्मबल को कमजोर कर सकती हैं।

लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
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