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योगी सरकार ने बदली प्राथमिक स्वास्थ्य की तस्वीर, गांवों तक पहुंचीं 24 घंटे चिकित्सा सेवाएं

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डिजिटल टीम, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में आया क्रांतिकारी बदलाव राज्य को एक नई पहचान दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने \“बीमारू\“ राज्य के ठप्पे को पीछे छोड़ते हुए स्वास्थ्य के क्षेत्र में \“उत्तम\“ बनने की ओर मजबूती से कदम बढ़ाए हैं। गांव-गांव तक फैली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की सुदृढ़ शृंखला ने यह सुनिश्चित किया है कि अब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ता।

  
24x7 सेवा और आधुनिक तकनीक: अब पीएचसी पर ही उपलब्ध हैं बड़े अस्पतालों जैसी सुविधाएं

योगी सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को केवल \“इमारतों\“ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों और विशेषज्ञ डॉक्टरों से सुसज्जित किया है।


  • संस्थागत प्रसव में वृद्धि: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 24 घंटे प्रसव सुविधा, पैथोलॉजी लैब और एक्स-रे जैसी सेवाओं की उपलब्धता ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को नया सुरक्षा कवच दिया है।

  • भर्ती और मानव संसाधन: दशकों से खाली पड़े डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के पदों को भरकर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच सुनिश्चित की गई है।

डिजिटल सर्विलांस और संचारी रोगों पर \“सर्जिकल स्ट्राइक\“

उत्तर प्रदेश में कभी आतंक का पर्याय माने जाने वाले संचारी रोगों—जैसे एईएस (AES), जेई (JE), डेंगू और मलेरिया—पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने डिजिटल सर्विलांस सिस्टम और लैब नेटवर्क को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया है।


  • लैब नेटवर्क: जांच प्रयोगशालाओं की संख्या में कई गुना वृद्धि से रोगों की शीघ्र पहचान और तत्काल उपचार संभव हुआ है।

  • ई-संजीवनी और टेलीमेडिसिन: दूरस्थ गांवों के मरीज अब ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से घर बैठे विशेषज्ञों से परामर्श ले रहे हैं, जिससे समय और संसाधनों की बड़ी बचत हो रही है।

  • आयुष्मान का सहारा: आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों के संकट से उबारा है।

टीकाकरण और चिकित्सा शिक्षा में बना देश का रोल मॉडल

प्रदेश सरकार ने \“एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज\“ के विजन के साथ चिकित्सा शिक्षा का दायरा बढ़ाकर प्राथमिक ढांचे को और मजबूती दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान जिस प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे ने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग और टीकाकरण का विश्व रिकॉर्ड बनाया, वह आज सामान्य दिनों में भी मृत्यु दर में गिरावट और टीकाकरण कवरेज में सुधार का आधार बना हुआ है। एम्बुलेंस सेवाओं (102 और 108) के सुदृढ़ीकरण और ऑक्सीजन प्लांट्स के विस्तार ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को एक नया आत्मविश्वास दिया है।

पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में जो परिवर्तन हुए हैं, वे जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। सीएचसी और पीएचसी को 24 घंटे प्रसव, पैथोलॉजी और एक्स-रे जैसी सुविधाओं से सुसज्जित करना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। डिजिटल सर्विलांस और लैब नेटवर्क के विस्तार से संचारी रोगों की समय पर पहचान और नियंत्रण संभव हुआ है। टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी जैसी पहल ने दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में गिरावट और टीकाकरण कवरेज में सुधार इस बात का संकेत है कि प्राथमिक स्वास्थ्य को दी गई प्राथमिकता सकारात्मक परिणाम दे रही है।
डॉ. लिली सिंह, पूर्व डीजी, स्वास्थ्य विभाग
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