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बांस से बनेगा इथेनॉल: असम में बना दुनिया का पहला बैम्बू बेस्ड प्लांट, 30 हजार किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

Chikheang 1 hour(s) ago views 149
  

दुनिया का पहला बांस-आधारित इथेनॉल संयंत्र असम में स्थापित



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। असम के गोलाघाट जिलान्तर्गत नुमालीगढ़ में स्थापित दुनिया के पहले बांस-आधारित बायो-इथेनॉल संयंत्र - असम बायो इथेनाल प्राइवेट लिमिटेड (एबीईपीएल) ने उत्तर-पूर्वी भारत की कृषि-अर्थव्यवस्था में एक नई क्रांति की नींव रखी है।

कंपनी ने अगले तीन वर्षों के भीतर 30 हजार से अधिक किसानों को अपने साथ जोड़ने का लक्ष्य रखा है। यह पहल संयंत्र के लिए कच्चे माल (बांस) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले साल सितंबर में उद्घाटन किए गए इस संयंत्र की लागत 4,930 करोड़ रुपये है।
दुनिया का पहला बांस-आधारित इथेनॉल संयंत्र असम में स्थापित

वर्तमान में यह संयंत्र अपने स्थिरीकरण चरण में है और अगले कुछ हफ्तों में पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार है।

तकनीकी विशिष्टता और उत्पादन क्षमता यह संयंत्र दुनिया की पहली ऐसी व्यावसायिक द्वितीय पीढ़ी की बायो-इथेनाल फैक्ट्री है, जो गन्ने या मक्के जैसे खाद्य फसलों के बजाय बांस को कच्चे माल के रूप में उपयोग करती है। संयंत्र की स्थापित उत्पादन क्षमता 49 हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।

एबीईपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपज्योति हजारिका ने बताया, \“ट्रायल रन के दौरान हमने 99.7 प्रतिशत शुद्धता वाला फ्यूल-ग्रेड इथेनाल तैयार किया है, जो 99.5 प्रतिशत के सामान्य मानक से भी बेहतर है।\“

इथेनाल के अलावा, संयंत्र सालाना इन उत्पादों का भी उत्पादन करेगा

19,000 टन फरफ्यूरल

11,000 टन एसिटिक एसिड

32,000 टन लिक्विड कार्बन डाई आक्साइड

25 मेगावाट ग्रीन पावर  
किसानों की आय और कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य

संयंत्र को पूरी क्षमता पर चलाने के लिए सालाना पांच लाख मीट्रिक टन हरे बांस की आवश्यकता होगी। इसके लिए अगले तीन वर्षों में 12,500 हेक्टेयर भूमि पर 60 लाख पौधे रोपने की योजना है।

कंपनी अब तक 4,200 से अधिक किसानों का पंजीकरण कर चुकी है और बिचौलियों को हटाकर सीधे उनके खातों में 2.4 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए जा चुके हैं।

हजारिका ने स्पष्ट किया, \“हम किसानों को कृषि भूमि बदलने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं, बल्कि बंजर और अप्रयुक्त भूमि की पहचान कर रहे हैं।\“

जब कंपनी 12,500 हेक्टेयर भूमि से बांस प्राप्त करने लगेगी, तब यह पूरी तरह से \“कार्बन न्यूट्रल\“ इकाई बन जाएगी। क्षेत्रीय विस्तार और \“जीरो-वेस्ट\“ माडल बांस की आपूर्ति के लिए संयंत्र के 300 किलोमीटर के दायरे को लक्ष्य बनाया गया है।
चाय बागान मालिक भी बांस की खेती के लिए आगे आए

इसमें असम के 16 जिले, अरुणाचल प्रदेश के चार, नगालैंड के पांच और मेघालय का एक जिला शामिल है। चाय बागानों की पांच प्रतिशत भूमि को गैर-चाय कार्यों के लिए उपयोग करने की सरकारी अनुमति के बाद, कई चाय बागान मालिक भी बांस की खेती के लिए आगे आए हैं।

यह संयंत्र एक \“जीरो-वेस्ट\“ सुविधा है, जहां बांस के हर हिस्से का उपयोग किया जाएगा। यह माडल राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लगभग 200 करोड़ रुपये का वार्षिक बूस्ट देने का अनुमान रखता है।
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