जंगली वराह के शिकार मामले में आयोजित प्रेसवार्ता में जानकारी देते सहायक वन संरक्षक गजेंद्र पाल सिंह माथुर व पीछे खड़े आरोपित।
जागरण संवाददाता, राउरकेला। राउरकेला वनमंडल क्षेत्र के अंतर्गत वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ वन विभाग ने खुलासा किया है। सहायक वन संरक्षक (ACF) गजेंद्र पाल सिंह माथुर के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने जंगली वराह (सूअर) के शिकार के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी वन विभाग को 15 फरवरी 2026 को जंगली वराह के शिकार की गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर टीम ने रघुनाथपाली थाना क्षेत्र के कंसर गांव निवासी फतेह सिंह (67) के घर की तलाशी ली। इस दौरान भारी मात्रा में वराह का मांस, बाल, खाल, शिकार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फंदे और कई घातक हथियार बरामद किए गए।
परंपरा के नाम पर किया जा रहा था अवैध शिकार
मुख्य आरोपी फतेह सिंह से कड़ी पूछताछ के बाद इस गिरोह के चार अन्य सदस्यों का भी खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपियों में पंकज कुमार सिंह (31), वितन सिंह (40), दुःखबंधु सिंह (24), प्रदीप सिंह (34) हैं।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी शिवरात्रि के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों की आड़ में वन्यजीवों का शिकार कर रहे थे।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का हो रहा उल्लंघन डीएफओ जशोवंत सेठी ने बताया कि यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का गंभीर उल्लंघन है। आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मंगलवार को सभी आरोपितों को जेएमएफसी (ग्रामीण) न्यायालय, राउरकेला में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
इस सफल ऑपरेशन में पानपोष रेंज के फॉरेस्टर यदुनाथ सेठी, दुःखु किसान, और फॉरेस्ट गार्ड संघमित्रा महंत व सबिता किसान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। |