बेवजह के गिल्ट से पाना है छुटकारा? इन 5 तरीकों से खुद को माफ करना सीखें (Image Source: Freepik)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी अक्सर पुरानी बातों को याद करके खुद को कोसते रहते हैं? क्या आपको लगता है कि “काश! मैंने वैसा न किया होता“? गिल्ट यानी आत्मग्लानि एक भारी पत्थर की तरह है, जिसे हम अपने सीने पर रखकर घूमते रहते हैं।
गलती करना इंसान की फितरत है, लेकिन उस गलती के बोझ तले दबे रहना समझदारी नहीं है। अगर आपको भी बार-बार गिल्ट महसूस होता है, तो इन 5 आसान तरीकों से आप अपने मन को हल्का कर सकते हैं।
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अपनी गलती को स्वीकारें
गिल्ट से बचने का सबसे पहला कदम है उसे स्वीकार करना। हम अक्सर अपनी गलती से भागते हैं या बहाने बनाते हैं, जिससे मन का बोझ और बढ़ता है। शीशे के सामने खड़े होकर खुद से कहें, “हां, मुझसे गलती हुई है और यह नॉर्मल है।“ जब आप सच को स्वीकार कर लेते हैं, तो आधा बोझ वहीं उतर जाता है।
माफी मांग लें या सुधार करें
अगर आपकी वजह से किसी को दुख पहुंचा है, तो बिना हिचकिचाए उनसे माफी मांग लें। एक छोटा-सा \“सॉरी\“ आपके गिल्ट को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है। अगर उस इंसान से अब बात करना संभव नहीं है, तो एक कागज पर अपनी भावनाओं को लिखें और उसे फाड़ दें या जला दें। यह तरीका मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत राहत देता है।
खुद को एक \“दोस्त\“ की तरह देखें
सोचिए, अगर आपके किसी करीबी दोस्त से वही गलती होती जो आपने की है, तो क्या आप उसे जिंदगी भर कोसते? नहीं ना! आप उसे समझाते और माफ कर देते। तो फिर खुद के साथ इतनी सख्ती क्यों? खुद के प्रति कोमल बनें। यह याद रखें कि एक गलती आपको \“बुरा इंसान\“ नहीं बनाती।
\“क्या सीखा\“ उस पर ध्यान दें
हर गलती एक सबक है। गिल्ट में डूबने के बजाय यह सोचें कि इस घटना ने आपको क्या सिखाया? क्या आप भविष्य में बेहतर निर्णय ले सकते हैं? जब आप अपनी गलती को एक \“सबक\“ के रूप में देखने लगते हैं, तो वह \“पछतावा\“ नहीं बल्कि \“अनुभव\“ बन जाता है।
आज में जीना शुरू करें
गिल्ट हमेशा \“भूतकाल\“ में रहता है। आप बीते हुए कल को नहीं बदल सकते, चाहे आप कितना भी सोच लें। लेकिन आप अपने \“आज\“ को खराब जरूर कर रहे हैं। अपना ध्यान उन कामों पर लगाएं जो अभी आपके सामने हैं। खुद को व्यस्त रखें और नई यादें बनाएं।
गिल्ट महसूस होना यह बताता है कि आपके अंदर एक अच्छा इंसान जिंदा है जिसे सही और गलत का फर्क पता है, लेकिन इस भावना को खुद को सजा देने के लिए इस्तेमाल न करें, बल्कि खुद को बेहतर बनाने के लिए करें।
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