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जमुई में 2 लोगों के विवाद की सजा काट रहा पूरा गांव, नहीं मिलता सरकारी योजनाओं का लाभ

deltin33 7 hour(s) ago views 972
  

जमुई में पूरा गांव भुगत रहा दो लोगों के विवाद की सजा। फोटो एआई जनरेटेड



अमित कुमार राय, चंद्रमंडी (जमुई)। चकाई का कर्णगढ़ गांव प्रखंड ही नहीं, शायद जमुई जिले और बिहार प्रदेश का इकलौता गांव होगा, जहां के रैयत के पिछले 25 वर्षों से जमीन का रसीद नहीं कट रहा है। यह स्थिति दो लोगों के बीच की कानूनी लड़ाई के कारण हुई है, पर सजा पूरा गांव भुगत रहा है।

रसीद नहीं कटने तथा दाखिल-खारिज पर विराम लगे होने के कारण सरकारी योजनाओं से रैयत वंचित हैं। दरअसल, 2001 में हरदेव सिंह एवं निशिकांत झा के बीच 20 डिसमिल जमीन को लेकर चल रहा विवाद जमुई न्यायालय पहुंच गया।

न्यायालय में केस नं. 33/5 दर्ज होने के बाद जमुई न्यायालय द्वारा गांव की जमीन का रजिस्टर टू का संपूर्ण कागजात चकाई अंचल कार्यालय से तलब किया गया।

25 वर्ष बीतने को हैं, लेकिन आज तक किसी अंचलाधिकारी ने रजिस्टर टू वापस लाने की जहमत नहीं उठाई। इन 20-25 वर्षों में हरदेव सिंह और निशिकांत झा की मौत भी हो गई। अब इस लड़ाई को फिलहाल हरदेव सिंह के वंशज प्रभाकर सिंह और निशिकांत झा के वंशज शशिकांत झा कोर्ट में लड़ रहे हैं।
400 से अधिक रैयत परेशान

जानकार बताते हैं कि अब तक इस विवाद का कोई फैसला भी न्यायालय से नहीं आ पाया है। इस कारण 2001 से ही कर्णगढ़ गांव के लोगों का ऑनलाइन रसीद नहीं कट रहा है, जिसका परिणाम हुआ कि रसीद नहीं कटने से यहां के 400 से अधिक रैयत को किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिल पा रही है।

इसके साथ ही रैयतों को लगान रसीद कटाने से लेकर भूमि से संबंधित त्रुटियां सुधार कराने तक भारी दिक्कतों का सामना 25 वर्षों से करना पड़ रहा है। खासकर कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

लालमोहन बरनवाल, मुन्नी देवी, रामजीवन सिंह, परमानंद बरनवाल, श्रीकांत सिंह सहित अन्य रैयतों का कहना है कि रजिस्टर टू कोर्ट में जमा रहने के कारण उनका ऑनलाइन नहीं हो पाया। इस कारण विभागीय पोर्टल से ऑनलाइन रसीद नहीं कट रहा है।

ऑफलाइन रसीद 2001 में कटा था। उसमें खाता तो दर्ज है, लेकिन खेसरा दर्ज नहीं है, जिससे लोगों का जमीन का म्यूटेशन भी नहीं हो पा रहा है। यहां के रैयतों का कहना है कि हम लोग जमीन की खरीद-बिक्री तो कर रहे हैं, लेकिन रजिस्टर टू अंचल कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहने के कारण जमीन का म्यूटेशन भी नहीं हो पा रहा है, जिससे हम लोगों को भारी कठिनाई हो रही है।

सरकार द्वारा चलाए गए प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, केसीसी सहित अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों को सम्मान योजना मिल रहा है, लेकिन अब उस पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

ग्रामीणों द्वारा कई बार अंचलाधिकारी से जमीन का रजिस्टर टू न्यायालय से वापस लेने की मांग की गई, आवेदन भी दिया गया, अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते लगाते थक गए, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। अब एक बार फिर से ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी को आवेदन देकर न्यायालय से रजिस्टर टू मांगने की गुहार लगाई है।
रैयतों की परेशानी


गांव लोगों की जमीन की लड़ाई की सजा पूरे गांव को मिल रही है। इससे हम लोग काफी परेशान हैं। ऑनलाइन रसीद के अभाव में कोई भी काम नहीं हो पा रहा। - संतोष बरनवाल

कोर्ट से रजिस्टर टू मांगने के लिए हम लोगों ने कई बार अंचल अधिकारी को आवेदन दिया, लेकिन अब तक किसी अंचल अधिकारी ने इस दिशा में प्रयास नहीं किया। -अजीत बरनवाल

रसीद नहीं कटने से जमीन का दाखिल-खारिज भी नहीं हो रहा है। हम लोग जमीन की खरीद-बिक्री तो करते हैं, लेकिन दाखिल-खारिज नहीं होने से सब बेकार हो जाता है। - दीनदयाल बरनवाल

अगर जल्द ही कोर्ट से रजिस्टर टू वापस नहीं लाया गया और ऑनलाइन रसीद काटने की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई तो हम लोगों को काफी कठिनाई हो जाएगी। - लालमोहन बरनवाल

ग्रामीणों के आवेदन के आलोक में रजिस्टर टू की मांग की गई है। न्यायालय से रजिस्टर टू मिलने के बाद इस पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाएगा। - राजकिशोर साह, सीओ, चकाई
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