हरियाणा में तेजी से बदला मौसम का मिजाज। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, रोहतक। फरवरी माह के मध्य में जहां सूरज की तपिश ने लोगों को समय से पहले गर्मी का अहसास दिलाना शुरू कर दिया था, वहीं बुधवार की सुबह 8 बजे से हुई बरसात ने अचानक मौसम का रुख पलट दिया है।
रोहतक, सांपला, महम, कलानौर और लाखनमाजरा सहित पूरे जिले में हुई बूंदाबांदी ने न केवल तापमान में गिरावट दर्ज की, बल्कि शीतल हवाओं ने एक बार फिर से ठंडक का अहसास करा दिया है।
मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने जहां एक ओर आमजन को गर्मी से राहत दी है, वहीं खेती, स्वास्थ्य और स्थानीय व्यापार पर इसके गहरे और मिश्रित प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों से जिले का पारा लगातार चढ़ रहा था, जिससे दोपहर के समय पंखे चलाने तक की नौबत आ गई थी। बुधवार को हुई इस बरसात के बाद अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार, बारिश का सबसे सकारात्मक पहलू पर्यावरण पर दिखा, धूल के कण बैठने से वायु गुणवत्ता सूचकांक पहले से कम दर्ज किया गया, जिससे हवा पहले के मुकाबले काफी साफ महसूस हुई।
यूं बरसे बदरा
- क्षेत्र : बरसात
- रोहतक : 06
- महम : 02
- सांपला : 06
- कलानौर : 01
- लाखनमाजरा : 01
- नोट : बरसात के आंकड़ें मिलीमीटर में हैं।
सरसों की पकती फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता
फरवरी का यह समय कृषि के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील होता है। इस समय सरसों की फसल पकने की कगार पर है और गेहूं की फसल में दाना बनने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो फिलहाल हुई हल्की बारिश से नुकसान जैसी स्थिति नहीं है, क्योंकि यह ठंडक दानों के विकास में सहायक हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने किसानों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श जारी किए हैं। किसान फिलहाल खेतों में सिंचाई पूरी तरह बंद कर दें। तेज हवा और अधिक नमी के कारण सरसों की भारी फसल गिरने का खतरा रहता है, जिससे पैदावार घट सकती है।
इस समय यूरिया या अन्य खादों का छिड़काव फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। नमी बढ़ने से सरसों में चेपा (एफिड) जैसे कीटों का हमला हो सकता है। किसान नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें।
मौसम के इस यू-टर्न ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
अचानक तापमान गिरने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे गले में संक्रमण, खांसी और वायरल बुखार के मामले बढ़ सकते हैं। हवा में नमी बढ़ने और पराग कणों के सक्रिय होने से दमा रोगियों और सांस की समस्या वाले बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
ग्राहकों की कमी से कारोबारियों के चेहरे पर मायूसी
बरसात का सबसे सीधा और नकारात्मक असर शहर के व्यापारिक केंद्रों पर देखा गया। रोहतक और आसपास के शहरों का कारोबार काफी हद तक ग्रामीण अंचल के लोगों पर निर्भर है। तड़के हुई बारिश और दिनभर की बूंदाबांदी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लोग खरीदारी के लिए शहर नहीं पहुंचे।
बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और दुकानों पर इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आए। रेहड़ी-फड़ी वालों और खुले में व्यापार करने वाले छोटे दुकानदारों का काम दिनभर बाधित रहा। व्यापारियों का कहना है कि शादी-ब्याह के सीजन के बीच इस तरह की अड़चन से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
मौसम विशेषज्ञ डा. मोहम्मद एहतशाम का अनुमान है कि आने वाले 24 से 48 घंटों तक बादल छाए रह सकते हैं और शीतल हवाओं का दौर जारी रहेगा।
जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इस बदलाव ने जीवन की रफ्तार को कुछ समय के लिए धीमा जरूर किया है, लेकिन प्रदूषण से मिली राहत और फसलों के लिए अनुकूल ठंडक इसके सकारात्मक पहलू हैं। |