इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अंतर।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अधिकतर छात्रों के बीच स्नातक पूरा करने के बाद सबसे बड़ी दुविधा यह रहती है कि वे इंजीनियरिंग की किस ब्रांस में करियर बनाएं। हालांकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग दोनों ही क्षेत्र इलेक्ट्रिक सिस्टम से संबंधित है। लेकिन इन दोनों के कार्य एक दूसरे से पूरी तरह से अलग होते हैं।
ऐसे में अगर आप भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे है और आपको भी यह निर्णय लेने में कठिनाई आ रही है कि इंजीनियरिंग का कौन-सा क्षेत्र आपके लिए बेहतर है। तो आज इस लेख के जरिये हम आपको दोनों के बीच एक बारीक अंतर बताएंगे। साथ ही आपको यह भी बताएंगे कि इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग दोनों में से कौन-सा क्षेत्र आपके करियर को एक नई उड़ान दे सकता है।
क्या है इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स दोनों ही क्षेत्र इंजीनियरिंग के लिए होते हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पावर प्लांट, ट्रांसफॉर्मर और हाई वोल्टेज वाले सिस्टम को ऑपरेट किया जाता है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में कंप्यूटर हार्डवेयर और मोबाइल संचार क्षेत्रों में काम किया जाता है।
कौन-सा क्षेत्र आपके लिए बेहतर
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स दोनों ही क्षेत्र आपकी रुचि पर पूरी तरह से निर्भर करता है। अगर आपको बड़ी मशीनें जैसे पावर सिस्टम क्षेत्र में रुचि है, तो आप इलेक्ट्रिकल इंजीनिरिंग की ओर से रुख कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको संचार जैसे गैजेट और नई-नई टेक्नोलॉजी को जानने व समझने में दिलचस्पी है, तो आप इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में करियर बना सकते हैं।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का स्वरूप
अगर आप इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स का चयन करते हैं, तो आपको इस कोर्स के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन, डिजिटल संचार प्रणाली, ट्रांसफॉर्मर, जनरेटर, ट्रांसमिशन लाइन, वायरिंग और इंस्टॉलेशन जैसे विषयों से परिचित किया जाएगा। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरा करने के बाद आप बिजली विभाग, रेलवे और पावर प्लांट में नौकरी कर सकते हैं। साथ ही साथ आप सरकारी नौकरी की भी तैयारी कर सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग पर भी एक नजर
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विषय गैजेट व टेक्नोलॉजी से संबंधित है। इस कोर्स के अंतर्गत आपको मोबाइल नेटवर्क, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, सेमीकंडक्टर जैसे विषयों से परिचित किया जाता है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद आप आईटी कंपनी, सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री, टेलीकॉम कंपनी और रोबोटिक्स के क्षेत्र में अपना एक सुनहरा भविष्य बना सकते हैं। बता दें, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के क्षेत्र में न केवल नौकरी की अपार संभावनाएं मौजूद है, बल्कि इस कोर्स को पूरा करने बाद कुशल पेशेवरों का ज्यादा पैकेज वाली सैलरी पर भी रखा जाता है।
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अंतर
- इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हाई वोल्टेज और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर लॉ वोलटेज वाली मशीनों को ऑपरेट करते हैं।
- इलेक्ट्रिकल इंजीनियर में ट्रांसफॉर्मर, जनरेटर और ट्रांसमिशन लाइन पर काम किया जाता हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग मोबाइल, कंप्यूटर आदि को ऑपरेट करते हैं।
- इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हाई करंट और ऊर्जा पर काम करते हैं, जबकि एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर सिग्नल और डाटा पर काम करते हैं।
- एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बिजली विभाग पर अपनी सेवाएं देते है और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों में काम करते हैं।
यह भी पढ़ें: दुनिया का एकलौता गांव जहां सड़क किनारे रहते हैं लोग, नहीं है एक भी गली और मोहल्ला |