गोरखपुर आरओ प्लांट। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बोतल बंद पानी की जांच में बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड मिलने के बाद यह तय है कि जार और टंकी का पानी भी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है। इसके बाद भी खाद्य सुरक्षा विभाग न तो जांच कर रहा है और न ही नमूने ले रहा है। विभाग प्रविधान न होने की मजबूरी बता रहा है तो लोग गंदा पानी पीकर पेट के रोगों में जकड़ते जा रहे हैं।
जिले में 15 सौ से ज्यादा आरओ प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। दिन-प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ भी रही है। महानगर में आरओ प्लांट संचालकों पर नजर रखने के लिए पंजीकरण की अनिवार्यता की गई थी। तत्कालीन महापौर सीताराम जायसवाल के कार्यकाल में नगर निगम की कार्यकारिणी और सदन ने इस व्यवस्था को पारित किया था, लेकिन अब तक आरओ प्लांट संचालकों का पंजीकरण तक नहीं हो सका है। नगर निगम के अधिकारी इतनी सुस्ती से काम कर रहे हैं कि अगला बोर्ड बनने के बाद भी यह कार्य पूरा होना संभव नहीं दिख रहा है।
सबमर्सिबल का पानी बेच रहे
कई आरओ प्लांट संचालक सबमर्सिबल का पानी बेच रहे हैं। प्लांट को यह संचालक दिखावे के लिए चलाते हैं, टंकियों व जार में सबमर्सिबल का ही पानी भरते हैं। इस पानी में टीडीएस का कोई पालन नहीं हो पाता है। लोग शुद्ध पानी मानकर इसे पीते हैं और रोगों की चपेट में आते हैं। महानगर की कौन कहे गांव की गलियों में भी अब आरओ प्लांट के संचालक घर-घर पानी पहुंचा रहे हैं। इनके पानी की गुणवत्ता की जांच हो जाए तो शुद्धता की हकीकत सामने आ जाए।
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सफाई का नहीं रखते ध्यान
टंकी और जार की रोजाना अच्छे से सफाई होनी चाहिए लेकिन आपूर्ति करने वाले ऐसा नहीं करते हैं। एक ही जार कई घरों में जाता है। जार ऊपर से गंदा दिखने लगता है, तब सफाई की जाती है। अंदर की सफाई कभी नहीं की जाती है।
पानी में यह रहती है कमी
मैग्नीशियम एवं कैल्शियम की मात्रा मानक सीमा से कम होती है।
टोटल डिजाल्व्ड सालिड्स (टीडीएस) भी मानक से कम होता है।
भूगर्भ जल प्रदूषित होने का हो रहा नुकसान
भूगर्भ जल के प्रदूषित होने का दुष्परिणाम लोग झेल रहे हैं। देसी व सरकारी हैंडपंपों से दूषित जल निकलने की पुष्टि होने के बाद डाक्टर लोगों को शुद्ध जल पीने की सलाह देते हैं। शुद्ध जल की आड़ में बड़ा कारोबार खड़ा हो गया है। लगातार पानी के दोहन से भूगर्भ जल का स्तर भी लगातार नीचे की ओर जा रहा है।
दूषित पानी के इस्तेमाल से कई तरह के रोग हो रहे हैं। इनमें पेट दर्द, दस्त, उल्टी, पीलिया, टायफाइड, एलर्जी, छींक आना, खांसी, आंखों में खुजली, सांस लेने में तकलीफ आदि शामिल हैं। लंबे समय तक दूषित पानी के सेवन से किडनी, लिवर और फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वालों के लिए यह पानी खतरनाक है। -
-डा. ओंकार राय, वरिष्ठ फिजिशियन |