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मेदिनीनगर मेयर सीट बनी ‘हॉट’, अपनों की बगावत और गठबंधन की दरार ने बढ़ाया सियासी पारा

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झारखंड निकाय चुनाव



जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। 23 फरवरी को होने वाला नगर निकाय चुनाव मेदिनीनगर की सियासत में नया इतिहास लिख सकता है। यह चुनाव कई दिग्गज नेताओं के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा। भले ही चुनाव तकनीकी रूप से निर्दलीय हो, लेकिन भाजपा, कांग्रेस और झामुमो जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

शहर सरकार की इस जंग में पहली बार केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व की सीधी दखल से सियासी पारा चढ़ गया है। माहौल लोकसभा और विधानसभा चुनाव जैसा बन गया है।
महागठबंधन में दरार, एनडीए में बागी मुसीबत

निकाय चुनाव ने महागठबंधन और एनडीए-दोनों की एकजुटता की परीक्षा ले ली है। महागठबंधन के दो प्रमुख दल कांग्रेस और झामुमो अलग-अलग प्रत्याशी मैदान में उतार चुके हैं।  

वहीं एनडीए खेमे में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के अलावा तीन बागी उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। इस स्थिति ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है और चुनाव सीधी प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गया है।
11 प्रत्याशी मैदान में, बैलेट से होगा मतदान

साल 2018 में नगर निगम गठन के बाद यह दूसरा चुनाव है। मेयर पद इस बार भी सामान्य महिला (अनारक्षित) है। वर्ष 2018 में आठ प्रत्याशी मैदान में थे, जिसमें भाजपा की अरुणा शंकर विजयी हुई थीं।इस बार 11 प्रत्याशी चुनावी रण में हैं।  

आठ वर्ष बाद हो रहे इस चुनाव में मतदान बैलेट पेपर से होगा, जबकि पिछली बार ईवीएम से वोटिंग हुई थी। बैलेट से मतदान होने के कारण बूथ मैनेजमेंट इस बार निर्णायक फैक्टर माना जा रहा है। सभी प्रमुख प्रत्याशी बूथ कमेटियों के गठन और मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाने में जुटे हैं।
झामुमो का बड़ा दांव, संगठन विस्तार पर नजर

झारखंड मुक्ति मोर्चा इस बार पूरे दमखम के साथ निकाय चुनाव में उतरा है। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष पूनम सिंह को पार्टी में शामिल कर झामुमो ने रणनीतिक चाल चली है। झामुमो जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा उर्फ गुड्डू सिन्हा के नेतृत्व में पूरी टीम लगातार प्रचार अभियान में सक्रिय है।  

पार्टी इस चुनाव को संगठन विस्तार के अवसर के रूप में देख रही है। यदि पार्टी को सफलता मिलती है तो पलामू जिले में उसका नया आधार मजबूत हो सकता है। हालांकि अब तक झामुमो के बड़े नेता चुनाव  कैंपेन में नहीं पहुंचे हैं लेकिन कल्पना सोरेन के पलामू आने की संभावना हैं। उनके आने से झामुमो को बढ़त मिलने की उम्मीद है।  
कांग्रेस का दांव नमिता त्रिपाठी पर

कांग्रेस ने मेदिनीनगर नगर निगम में नमिता त्रिपाठी पर भरोसा जताया है। वह पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केएन त्रिपाठी की पुत्री हैं। केएन त्रिपाठी पिछले विधानसभा चुनाव में डालटनगंज सीट से एक लाख से अधिक मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे थे। नगर निगम क्षेत्र में उन्हें अच्छी बढ़त मिली थी।  

इसी आधार पर कांग्रेस जीत की उम्मीद लगाए हुए है। पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि कोई बागी प्रत्याशी मैदान में नहीं है। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर परंपरागत वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम हो रहा है। इंटक और कांग्रेस से जुड़े नेता लगातार प्रचार अभियान में सक्रिय हैं।
भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर

भाजपा समर्थित प्रत्याशी अरुणा शंकर के पक्ष में प्रदेश स्तर के कई नेता मेदिनीनगर में कैंप कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज दौरा कर चुके हैं।  

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मेदिनीनगर और चैनपुर में अरुणा शंकर के समर्थन में सभा की। उनके प्रयास से भाजपा की एक बागी प्रत्याशी मीना गुप्ता और निर्दलीय प्रत्याशी जयश्री गुप्ता ने समर्थन की घोषणा करते हुए मैदान से हटने का निर्णय लिया।  

पलामू सांसद बीडी राम, पांकी विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता, सदर विधायक आलोक चौरसिया और पूर्व मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी सहित अन्य नेता सक्रिय हैं। हालांकि तीन बागी प्रत्याशी अब भी मैदान में डटे हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बनी हुई है। ऐसे में भाजपा के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।
निर्दलीय चुनाव, पर दलों की सीधी टक्कर

तकनीकी रूप से यह चुनाव निर्दलीय है, लेकिन जमीनी हकीकत में भाजपा, कांग्रेस और झामुमो के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी रिंकू सिंह चौथा कोण बनाने में जुटी है। 23 फरवरी का फैसला न केवल शहर सरकार का मुखिया तय करेगा, बल्कि पलामू की सियासत में कई चेहरों की साख और कद भी निर्धारित करेगा।
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