Sadar Thana Daroga Arrest: बुधवार को निगरानी की टीम के हत्थे चढ़े भास्कर मिश्रा। फोटो सौ. निगरानी
संजीव कुमार, जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Bribery Case: 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सदर थाने के दारोगा भास्कर कुमार मिश्रा को मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम द्वारा गिरफ्तार किए गए दारोगा को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाएगा। बुधवार को निगरानी की टीम ने सदर थाना गेट के बाहर 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए दारोगा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
पटना में शिकायत दर्ज कराई
बताया गया कि पियर थाना क्षेत्र के रामपुरदयाल निवासी अमन कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सदर थाना में पिछले साल दर्ज एक लापता मामले की केस डायरी में मदद करने के एवज में दारोगा द्वारा रिश्वत मांगी जा रही है। निगरानी ब्यूरो द्वारा कराए गए सत्यापन में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर ट्रैप की कार्रवाई की गई।
प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर पुलिस उपाधीक्षक संजय कुमार, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में गठित धावादल ने कार्रवाई करते हुए दारोगा भास्कर कुमार मिश्रा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह दो दिनों के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे एक दिन पहले पटना से पहुंची स्पेशल विजिलेंस यूनिट की टीम ने प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी हिमांशु कुमार और उसके निजी चालक रामबाबू राय को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इससे पहले भी जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था।
हाल ही में हुई थी शादी
पूर्णिया जिले के मूल निवासी भास्कर कुमार मिश्रा 2019 बैच के दारोगा हैं। वह करीब ढ़ाई वर्षों से सदर थाने में तैनात थे और यहीं प्रशिक्षण भी लिया था। करीब दो महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी। पूर्व में भी उनकी कार्यशैली को लेकर शिकायतें वरीय अधिकारियों तक पहुंची थीं, लेकिन तब कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
निगरानी की सख्त चेतावनी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए कड़ा संदेश है। रिश्वत लेने या मांगने वालों को जेल के साथ नौकरी से भी हाथ धोना पड़ेगा।
निगरानी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इस वर्ष भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह 21वीं प्राथमिकी है। इनमें 19 ट्रैप मामले हैं, जिनमें अब तक 15 आरोपितों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। बरामद रिश्वत की कुल राशि 7 लाख 57 हजार रुपये बताई गई है।
निगरानी ब्यूरो ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी सरकारी पदाधिकारी या कर्मी द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है, तो बिना भय के तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। |
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