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हैदराबाद के कई बिरयानी रेस्टोरेंट IT के रडार पर, 70 हजार करोड़ की टैक्स चोरी में 5 राज्यों से जुड़े तार

LHC0088 3 hour(s) ago views 615
  

आयकर विभाग ने ₹70,000 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हैदराबाद में फूड और बेवरेज इंडस्ट्री में हलचल मचा देने वाला खुलासा हुआ है। आयकर विभाग की हैदराबाद इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने बिरयानी रेस्टोरेंट चेन की गहन जांच से पूरे देश में हजारों करोड़ रुपये के टैक्स चोरी घोटाले का पर्दाफाश किया है।

एक लाख से ज्यादा रेस्टोरेंट्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बिलिंग सॉफ्टवेयर के 60 टेराबाइट ट्रांजेक्शनल डेटा का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद विभाग ने चौंकाने वाले नतीजे मिले।

वित्तीय वर्ष 2019-20 से अब तक रेस्टोरेंट्स ने कम से कम 70,000 करोड़ रुपये की बिक्री को जानबूझकर छिपाया है। छिपाई गई आय पर अब टैक्स और भारी पेनल्टी की गणना चल रही है।
AI और बिग डेटा ने किया कमाल

जांच टीम ने 1.77 लाख रेस्टोरेंट आईडी के डेटा को खंगालने के लिए बिग डेटा एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई टूल्स का इस्तेमाल किया।

यह सॉफ्टवेयर पूरे देश के रेस्टोरेंट बिलिंग मार्केट का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। पूरे भारत में 70,000 करोड़ रुपये में से 13,317 करोड़ रुपये के पोस्ट-बिलिंग डिलीशन दर्ज किए गए।

सिर्फ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह आंकड़ा 5,141 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। दोनों राज्यों के 40 रेस्टोरेंट्स के सैंपल में फिजिकल और डिजिटल जांच से 400 करोड़ रुपये की कमी सामने आई।
इन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा चोरी

टैक्स चोरी के मामले में टॉप पांच राज्य रहे- तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात हैं। कर्नाटक में करीब 2,000 करोड़, तेलंगाना में 1,500 करोड़ और तमिलनाडु में 1,200 करोड़ रुपये की चोरी पकड़ी गई।

एक अनुमान के मुताबिक कुल बिक्री का 27 प्रतिशत हिस्सा दबाया गया था। कई रेस्टोरेंट मालिकों ने इनकम टैक्स रिटर्न में बिक्री कम दिखाई, लेकिन रिकॉर्ड मिटाने की भी जहमत नहीं उठाई।
फ्रॉड के दो बड़े पैटर्न

अहमदाबाद स्थित बिलिंग सॉफ्टवेयर कंपनी के डेटा सेंटर से मिली जानकारी के आधार पर हैदराबाद के डिजिटल फोरेंसिक लैब में विश्लेषण किया गया।

मुख्य पैटर्न थे- कैश इनवॉइस को चुन-चुनकर डिलीट करना और चुनी हुई तारीखों की पूरी बिलिंग को बल्क में मिटा देना।

2019-20 से 2025-26 तक के छह वित्तीय वर्षों में कुल 2.43 लाख करोड़ रुपये की बिलिंग का डेटा खंगाला गया। शुरुआत दक्षिण भारत के शहरों से हुई, जिसके बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने पूरे देश में जांच फैला दी।

अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। देश में कई अन्य बिलिंग प्लेटफॉर्म भी चल रहे हैं, जिनकी बैकएंड जांच जल्द शुरू हो सकती है।
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