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धूल खा रही 24 करोड़ की रोवर मशीनें, हरियाणा में भूमि पैमाइश का मॉडर्न प्लान फेल

Chikheang 1 hour(s) ago views 223
  

हरियाणा में भूमि पैमाइश के आधुनिकीकरण के लिए अप्रैल 2025 में खरीदी गईं 300 रोवर मशीनें, जिन पर ₹24 करोड़ खर्च हुए, अप्रयुक्त पड़ी हैं। एआई इमेज



बलवान शर्मा, नारनौल। अप्रैल 2025 में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने ज़मीन की पैमाइश को मॉडर्न बनाने के लिए 300 रोवर मशीनें खरीदी थीं। ये मशीनें लार्ज स्केल मैपिंग (LSM) प्रोजेक्ट के तहत खरीदी गई थीं, जिसका मकसद चेन सर्वे को खत्म करके मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सही सीमांकन करना था।

हैरानी की बात है कि जिस मकसद के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है। सूत्र बताते हैं कि सरकार ने हर मशीन पर करीब आठ लाख रुपये खर्च किए। करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश भर की तहसीलों में भेजी गई इन मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

सूत्रों का कहना है कि पटवारियों ने भी डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों को बताया है कि बिना टेक्निकल ऑपरेटर के मशीनों को चलाना नामुमकिन है। इसका फायदा प्राइवेट सर्वेयर उठा रहे हैं। सरकार ने पैमाइश के लिए सिर्फ दो से तीन हजार रुपये फीस तय की है, जबकि प्राइवेट ऑपरेटर 10 से 15 हजार रुपये ले रहे हैं।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि रेवेन्यू कम होने के डर से सरकार के इस बड़े प्रोजेक्ट को जानबूझकर रोका जा रहा है। अकेले महेंद्रगढ़ जिले में कुल नौ मशीनें दी गईं। यहां छह तहसील और सब-तहसील हैं। एक तहसील में हर साल औसतन 150 नाप-जोख होती है।

पूरे जिले में यह आंकड़ा 900 से ज्यादा है, और पूरे राज्य में यह आंकड़ा हजारों में है। डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर राकेश छोकर ने बताया कि नारनौल में चल रही मैप स्कीम के तहत नाप-जोख के लिए जिले की रोवर मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन मशीनों का इस्तेमाल करने का मकसद

हरियाणा में ज़मीन नापने के लिए चेन सर्वे बंद करना था और रोवर्स का इस्तेमाल करके सीमांकन किया जाना था। इसी मकसद से, अप्रैल 2025 में पटवारियों और कानूनगो को राज्य-स्तरीय ट्रेनिंग भी दी गई थी। पहले, राज्य में ज़मीन के सीमांकन के लिए चेन सर्वे की पुरानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे और CORS-आधारित जियो-रेफरेंसिंग सिस्टम पर आधारित मॉडर्न टेक्नोलॉजी शुरू की गई हैं।

पटवारियों का कहना है कि मशीनें ठीक से काम नहीं करती हैं। आज तक कोई भी पटवारी इन मशीनों से ज़मीन का माप नहीं कर पाया है। रेवेन्यू कानूनगो और पटवारी एसोसिएशन ने कई बार ट्रेनिंग की रिक्वेस्ट की है। कंपनी के कर्मचारी PPT के ज़रिए ट्रेनिंग देते हैं। मशीन जमीन पर काम नहीं करती। यह GPS के जरिए सैटेलाइट से कनेक्ट नहीं हो पाती।
दक्षिण हरियाणा में रोवर्स मशीन के इस्तेमाल का स्टेटस

    जिला तहसील सब-तहसील रोवर्स मशीनें ऑपरेटरों की संख्या ट्रेनिंग / स्थिति
   
   
   फरीदाबाद जिला
   3
   5
   15
   0
   पटवारियों की ट्रेनिंग शुरू हुई लेकिन पूरी नहीं हो सकी (केवल 12वीं तक पढ़ाई के कारण)
   
   
   गुरुग्राम जिला
   6
   3
   18
   -
   मेजरमेंट का काम चल रहा है
मानेसर नगर निगम - 10
   
   
   सोनीपत जिला
   4
   2
   10
   0
   पटवारियों को ट्रेनिंग दी गई।
ज़िला रेवेन्यू ऑफिसर सुशील कुमार: दोबारा ट्रेनिंग दी जाएगी
   
   
   पलवल जिला
   3
   2
   8
   0
   -
   
   
   रेवाड़ी जिला
   3
   5
   6
   0
   गिरदावरों और पटवारियों को ट्रेनिंग दी गई
   
   
   महेंद्रगढ़ जिला
   5
   1
   9
   0
   गिरदावरों और पटवारियों को ट्रेनिंग दी गई
   

नोट: अधिकांश जिलों में रोवर्स मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन ऑपरेटरों की कमी और ट्रेनिंग संबंधी चुनौतियों के कारण पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है।

यह भी पढ़ें: नारनौल बाईपास विस्तार परियोजना: शहर को मिलेगा सिक्स-लेन रिंग रोड, जाम से मिलेगी मुक्ति
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