जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। किसी ट्रेन के कोच में यदि आग लगती है तो लोको ड्राइवर का पहला काम है कि वे फ्लेसर लाइट जलाएं और ट्रेन को उचित स्थान पर खड़ी करें, ताकि यात्री आसानी से बाहर निकल सकें।
टाटानगर रेल सिविल डिफेंस द्वारा गुरुवार को इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। जहां रेलवे भर्ती बोर्ड से नियुक्त 400 सहायक पायलट व ट्रेनी लोको पायलट शामिल हुए।
इस दौरान इंजन व कोच में आग लगने के कारणों की जानकारी देते हुए सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने बताया कि यात्रियों द्वारा ज्वलनशील प्रद्वार्थों जैसे गैस स्टोव, सिलेंडर, पेट्रोल, पटाखा सहित अन्य ज्वलनशील प्रद्वार्थों के साथ सफर करना वर्जित है। कई बार देखा गया है कि यात्री ट्रेन में बीडी-सिगरेट, जलती माचिस की तिलियों को लापरवाही पूर्वक इधर-उधर फेंक देते हैं।
इसके अलावा पेंट्री कार में गैस रिसाव, विद्युत उपकरण व खुल तारों से शार्ट सर्किट होने के कारण आग लगती है। आग लगने की स्थिति में ड्राइवरों को ट्रेन की स्थिति की जानकारी स्टेशन मास्टर को देना है और जिस कोच में आग लगी हो उसे अन्य कोच से काटकर 45 मीटर दूर अलग रख देना है।
साथ ही ट्रेन को ढुलने से बचाव करना और अग्निशमन यंत्रों से आग पर काबू पाने का प्रयास करना है। उन्होंने बताया कि सभी इंजन में चार, ब्रेक वेन में दो, प्रत्येक एसी कोच में एक-एक, पेंट्री कार में दो-दो और जनरेटर कार में चार-चार फायर संयंत्र उपलब्ध रहते हैं।
इसके अलावा उन्होंने प्रशिक्षुओं को रूल आफ नाइन, ट्राई एज विधि, शरीर में आग लगने पर स्टाप, ड्राप एंड रोल, धुंआ भरने पर इंजन से निकलने, रेस्क्यू करने व क्रालिंग विधि को माक ड्रिल के माध्यम से बताया। वहीं, डेमोंस्ट्रेटर अनामिका मंडल ने प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी दी।
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