राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में जाति प्रमाण पत्र बनवाने में हो रही देरी और बाधाओं को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार जल्द नई व्यवस्था लागू करने जा रही है।
विधान सभा में गुरुवार को समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि इससे जाति प्रमाण पत्र बनवाना पहले से आसान हो जाएगा। इसके लिए राजस्व परिषद एक नया साफ्टवेयर तैयार करवा रहा है।
सपा सदस्य वीरेंद्र यादव और जय प्रकाश अंचल ने गोंड और खरवार जाति के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया था।
उन्होंने कहा कि लोगों को डीएम कार्यालय से लेकर तहसील मुख्यालय तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन प्रमाण पत्र बनाने में आनाकानी की जा रही है। समाज कल्याण मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 17 जिलों में इन जातियों के लिए एसटी प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था है।
जिन परिवारों में पहले से एसटी प्रमाण पत्र बना है और जिनकी फैमिली आइडी बनी हुई है उनके सदस्यों के प्रमाण पत्र जल्दी बन जाते हैं।पहली बार आवेदन करने वालों के मामले में विस्तृत जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2002 में 13 जिलों महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मीरजापुर और सोनभद्र में एसटी प्रमाण पत्र जारी करने की सुविधा शुरू की गई थी।
इसके बाद वर्ष 2022 में संतकबीरनगर, कुशीनगर, चंदौली और भदोही को भी इसमें शामिल किया गया। इन सभी जिलों में प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया जारी है। मंत्री ने कहा कि जहां देरी की शिकायतें हैं, वहां प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी, लेकिन पहली बार प्रमाण पत्र बनवाने वालों के लिए निर्धारित जांच प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है। |