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इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।
सुमित जोशी, हल्द्वानी । प्रदेश के 118 स्नातक और स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में किताबों का संकट बना हुआ है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू होने के बाद समस्या बढ़ गई है। नए पाठ्यक्रम के अनुसार पर्याप्त किताबें नहीं होने की वजह से छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इन सभी परेशानियों को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ई-पुस्तकालय की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रहा है। स्वामी विवेकानंद ई-पुस्तकालय योजना के तहत डिजिटल रूप में पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। जिससे विद्यार्थियों को एक क्लिक पर नई किताबें मिल पाएंगी।
इसे लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव विक्रम सिंह यादव ने बीते दिनों इस संबंध में पत्र जारी किया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय, दून विश्वविद्यालय, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सहित नौ राज्य विश्वविद्यालयों के सभी विषयों के विभागाध्यक्षों से ई-बुक्स की सूची मांगी गई है।
साथ ही महाविद्यालयों से भी करीब 51 विषय विशेषज्ञों को चुना गया है। जो अपने विषय से संबंधित किताबों को लेकर सुझाव देंगे। प्राध्यापकों के साथ मंथन करने के बाद ई-पुस्तकों को लेकर कार्यवाही आगे बढ़ेगी। अगर यह कवायद सफल रही तो सरकारी कालेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को बड़ी सौगात मिलेगी। साथ ही शोधार्थियों के लिए यह लाभकारी होगी।
24 व 25 फरवरी को देहरादून में होगी बैठक
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार ई-पुस्तकों के मामले में 24 और 25 फरवरी को देहरादून में बैठक प्रस्तावित है। पहले दिन विज्ञान विषय और प्रोफेशनल कोर्सों को लेकर चर्चा होगी। दूसरे दिन कला, वाणिज्य और प्रबंधन संबंधित विषयों की किताबों के चयन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
विश्वविद्यलयों को देनी होगी पहले से उपलब्ध किताबों की जानकारी
विश्वविद्यालयों ने पूर्व में अपने स्तर पर ई-बुक्स भी खरीदी हैं। साथ ही प्रकाशनों के सब्सक्रिप्शन भी लिए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों को इनकी भी सूचना उच्च शिक्षा विभाग को देनी होगी। ताकि फिर से वही किताबें न खरीदी जाएं।
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