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जम्मू-कश्मीर में बिजली क्षेत्र बना राज्य के बजट पर बोझ, 4000 करोड़ के राजस्व घाटे की आशंका

LHC0088 1 hour(s) ago views 384
  

चालू वित्त वर्ष में बिजली खरीद खर्च और वसूली में बड़ा अंतर।



जागरण संवाददाता, जम्मू। लगातार केंद्रीय सहायता के बावजूद बिजली क्षेत्र राज्य के बजट पर सबसे बड़ा बोझ बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष में ही लगभग 4000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे की आशंका जताई गई है, जो उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि और बिजली खरीद पर हुए खर्च के बीच अंतर को दर्शाता है।

आंकड़ों के अनुसार जम्मू प्रांत में 7084 मिलियन यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई।यहां 3000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 2154 करोड़ रुपये की वसूली हुई है।हानियां 30-32 प्रतिशत बताई गई हैं।

कश्मीर प्रांत में 8413 मिलियन यूनिट खपत के साथ 2915 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित था, जिसमें से 1973 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। यहां हानियां 45-46 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं।

उधमपुर जिला बेहतर प्रदर्शन करता दिख रहा है, जहां 180 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 162 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है और यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है। यहां हानियां मात्र 5-6 प्रतिशत बताई गई  हैं।
...तो 115 करोड़ रुपये की छूट मिल सकती थी

दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि समय पर भुगतान न होने के कारण निगमों को 15 प्रतिशत ब्याज देना पड़ा, जिससे 131 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हुए। यदि समय पर भुगतान किया जाता तो 115 करोड़ रुपये की छूट मिल सकती थी और सरकारी खजाने को 246 करोड़ रुपये के नुकसान से बचाया जा सकता था।

बिजली निगमों के कर्मचारियों की संख्या भी सामने आई है। केपीडीसीएल में 6342 कर्मचारी कार्यरत हैं और इसका बजट 585 करोड़ रुपये है, जबकि जेपीडीसीएल में 4689 कर्मचारी हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद बिजली विभाग की वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं और पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।
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