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हापुड़ में साइबर ठगी का भंडाफोड़: फर्जी हैंडीक्राफ्ट फर्म से लाखों की धोखाधड़ी, एक आरोपी गिरफ्तार

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हापुड़ में साइबर सेल ने ठग को किया गिरफ्तार। सांकेतिक तस्वीर



केशव त्यागी , हापुड़। थाना देहात पुलिस व साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंटरनेट मीडिया मीडिया के जरिए ठगी करने वाले एक शातिर साइबर ठग को गिरफ्तार किया है।

आरोपित फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर हैंडीक्राफ्ट व टेंट डेकोरेशन का सामान सस्ते दाम में बेचने का लालच देता था और एडवांस के नाम पर रकम हड़प लेता था। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से एक मोबाइल फोन व सिम कार्ड बरामद किया है। आरोपित के जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी पुलिस को अहम जानकारी हाथ लगी है।

एसपी ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 4सी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के तहत संचालित समंवय/प्रतिबिंब पोर्टल पर लंबित साइबर शिकायतों की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान कुछ मोबाइल नंबर संदिग्ध पाए गए।

गहनता से जांच में सामने आया कि बिहार के मुजफ्फरपुर का जितेंद्र कुमार से करीब 82 हजार रुपये तथा गुजरात के गांधीनगर के राणा सूरजसिंह से 96,700 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी।
सोशल साइट पर झांसा देकर की ठगी

दोनों मामलों में इंस्टाग्राम और फेसबुक पर टेंट व डेकोरेशन का सामान सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराने का झांसा दिया गया था। रकम मिलने के बाद न तो सामान भेजा गया और न ही पैसे लौटाए गए।

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जांच में पाया गया कि ठगी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर बंद कर दिए गए थे। लेकिन तकनीकी सर्विलांस के दौरान संबंधित आईएमईआई नंबर में एक नया मोबाइल नंबर सक्रिय मिला। इसी आधार पर पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की और थाना देहात क्षेत्र के गांव सलाई क्षेत्र में दबिश दी।

मुखबिर की सूचना पर सुल्तानपुर मार्ग के कच्चे रास्ते के कट के पास खड़े एक युवक को घेराबंदी कर दबोच लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम गांव सलाई का दीन मोहम्मद बताया।
ऐसे रचते थे ठगी का जाल

आरोपित ने पूछताछ में बताया कि वह अपने भाई साजिद के साथ मिलकर फर्जी फेसबुक पेज और इंस्टाग्राम प्रोफाइल बनाता था। विभिन्न नामों से पेज बनाकर अन्य व्यापारियों के हैंडीक्राफ्ट व डेकोरेशन आइटम की फोटो डाउनलोड कर अपलोड की जाती थीं।

ग्राहकों को वाट्सएप काल पर फोटो और वीडियो दिखाकर विश्वास में लिया जाता था। इसके बाद माल तैयार करने और बुकिंग के नाम पर एडवांस रकम अपने या परिचितों के खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी।

रकम मिलने के बाद सिम तोड़कर फेंक दी जाती थी और नया नंबर चालू कर लिया जाता था। आरोपित ने स्वीकार किया कि वे दूर-दराज के राज्यों के लोगों को निशाना बनाते थे ताकि कोई सीधे उनके पास न पहुंच सके और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
गिरोह के अन्य सदस्य भी चिन्हित

पूछताछ में सामने आया कि आरोपित को यह तरीका सलीम नामक युवक ने सिखाया था, जिसे 15 फरवरी 2026 को मेरठ पुलिस द्वारा अन्य मामले में जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब आरोपित के भाई साजिद और अन्य संभावित साथियों की तलाश में जुटी है।

एसपी ने आमजन से अपील की है कि इंटरनेट मीडिया पर सस्ते सामान के लालच में आकर किसी भी अनजान प्रोफाइल या फर्जी फर्म पर भरोसा न करें। किसी भी ऑनलाइन भुगतान से पहले विक्रेता की सत्यता की जांच अवश्य करें। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

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