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मां के बाद सिर से उठा पिता का साया, अब डीह पुलिस ने उठाई 4 नाबालिग बच्चों की जिम्मेदारी

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संवाद सूत्र, डीह (रायबरेली)। डीह पुलिस ने मानवता की नई मिसाल पेश की है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व मां व दो दिन पूर्व पिता को खो चुके चार नाबालिग बच्चों की स्थानीय पुलिस जिम्मेदारी उठाई है। न सिर्फ खाना और कपड़े बल्कि उन्हें कच्ची झोपड़ी की जगह पक्का मकान उपलब्ध कराने का बीड़ा भी पुलिस ने उठाया है। पुलिसकर्मियों की इस पहल की हर ओर जोर शोर से चर्चा व खूब तारीफें हो रही हैं। साथ ही समाजसेवी भी अब पुलिस की इस पहल में सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं।

डेढ़ साल पहले पत्नी की हो चुकी थी मौत

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए गए पूरे दुबे मजरे लोधवारी निवासी चिंतामणि का शव शुक्रवार को सई नदी में उतराता मिला था। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार की शाम शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक चिंतामणि की पत्नी की भी डेढ़ वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है।

मृतक के चार बच्चे 12 वर्षीय मन्नो, नौ वर्षीय मनीष, छह वर्षीय मंदीप व तीन वर्षीय मांडवी हैं। चिंतामणि मजदूरी कर बच्चों का पालन पोषण करते थे। ग्रामीणों के अनुसार मृतक की जमा पूंजी के नाम पर सिर्फ एक टूटी फूटी झोपड़ी है, उसके पास न तो कोई जमीन थी न ही आवास समेत अन्य किसी सरकारी योजना का उसे लाभ मिल पाया था। ग्रामीणों के प्रयास से दो माह से परिवार को राशन मिलने लगा था।

पुलिस बनी सहारा

पहले मां फिर पिता की मौत के बाद चारों बच्चों के सामने जीवन एक कड़ी चुनौती है। परिवार में सहारे के नाम पर सिर्फ उनके 80 वर्षीय दादा चंद्रिका हैं। सिर छिपाने के लिए बच्चे कच्ची दीवारों और पालीथीन से ढकी एक जर्जर झोपड़ी में रह रहे है, जिसमें दरवाजा तक नहीं है। घर में खाने के लिए अनाज है न सोने के लिए बिस्तर न ही पहनने के लिए ढंग के कपड़े।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं तो मानों उनसे कोसों दूर हैं। ऐसी स्थिति में डीह पुलिस ने शनिवार को मानवीय पहल करते हुए बच्चों की जिम्मेदारी उठाई। पुलिसकर्मियों ने बच्चों के लिए भोजन, वस्त्र आदि की व्यवस्था की, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था कर रही है।

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इसके अतिरिक्त बच्चों और उनके वृद्ध दादा के लिए एक पक्का आवास भी बनवाने का प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस की इस मानवीय पहल को देखते हुए क्षेत्र के कई समाजसेवी भी आगे आकर आर्थिक सहयोग तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध करा रहे हैं। प्रशासन और समाज की इस पहल से बच्चों के जीवन में आशा की किरण जगी है।
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