इमरान खान की पूरी कहानी
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। इमरान खान ये नाम सुनकर एक ऐसे व्यक्ति के व्यक्तित्व की छबि आंखों के सामने आती है, जिसके जहन में हार शब्द भी नहीं आता था। इमरान मैदान पर अपनी गेंदबाजी से बल्लेबाजों का स्टंप उखाड़ते, तो मैदान के बाहर वे अपने लुक से हसीनाओं के दिल चुराते। इमरान का खौफ ऐसा होता था कि अगर भारत का मैच होता, तो लोग भगवान से प्रार्थना करते कि बल्लेबाज आउट न हो। इमरान वो हैं, जिन्होंने हार से घिरे पाकिस्तान को वर्ल्ड चैंपियन बनाया।
इमरान की जिद्द ऐसी कि वो जो हासिल करना चाहते, उसके लिए पूरी लगन के साथ मेहनत करते और हासिल कर लेते थे। तभी तो 1992 में, जब वे पाकिस्तान के वर्ल्ड कप जीतने की बात करते, तो लोगों को भरोसा नहीं होता था। हालांकि, ये इमरान का जज्बा ही था कि टीम विश्व चैंपियन बनी। इसी तरह से वे रजानीति में आए, तो पॉलिटिक्स का भी मैदान मारा और देश के प्रधानमंत्री बने लेकिन इस वक्त उन्हें अंधकार की काली छाया ने घेर रखा है।
इमरान खान का जादू
इमरान खान का जादू मैदान पर तो बोलता ही था लेकिन वे हसीनाओं के दिल चुराने भी माहिर थे। इमरान अपने जमाने के शायद सबसे अधिक आकर्षक क्रिकेटर थे। तभी तो उनको लेकर एक बार जावेद मियांदाद ने कहा था कि “जब इमरान गेंद को अपने ट्राउजर के आगे रगड़ते हैं, तो औरतें एक्साइटेड हो जाती थी और जब पीछे, तो पठान।“ मियांदाद की ये बातें भले ही अजीब लगें लेकिन इमरान का जलवा कुछ इसी तरह देखने को मिलता था। इमरान को लेकर पागलपन ऐसा था कि उनकी चर्चा लाहौर से लेकर लंदन तक एक जैसी ही होती थी।
इमरान की गेंदबाजी का खौफ
इमरान की गेंदबाजी का खौफ इस कदर था कि भारत कराची में एक टेस्ट मैच बचाने की कोशिश कर रहा था। भारत ने एक विकेट गंवाकर 101 रन बनाया था और टीम इंडिया के लिए सुनील गावस्कर बल्लेबाजी कर रहे थे। उस समय में भारत की बल्लेबाजी का मतलब ही गावस्कर होता था। उस समय टीवी इतने प्रचलित नहीं थे और लोग रेडियो पर कमेंट्री सुनते थे। पाकिस्तान से चिश्ती मुजाहिद कमेंट्री कर रहे थे कि इमरान गेंदबाजी के लिए आ रहे हैं और गावस्कर उनका सामना करेंगे। इसके बाद हर भारतीय फैंस ने दुआ की, गावस्कर किसी तरह बचे रहें लेकिन गावस्कर अधिक समय तक टिक नहीं सके और इमरान की एक अंदर आती हुई गेंद उनके स्टंप उड़ा गई।
इमरान का जिगरा
इमरान का जिगरा इस तरह का था कि वे पहले ही किसी को चेतावनी दे देते थे। सुनील गावस्कर ने बताया था कि इमरान ने 1986 में उन्हें संन्यास लेने से रोका था और कहा था कि मैं भारत को तुम्हारे रहते हुए हराना चाहता हूं।
इमरान खान ने कई खिलाड़ी बनाए
कप्तान, तो बहुत हुए लेकिन शायद इमरान जैसा कोई न हुआ। उन्होंने पाकिस्तान को चैंपियन ही नहीं बनाया बल्कि क्रिकेटर्स की ऐसी नस्ल बना दी, जिसने आने वाले दशकों में अपनी दहशत बनाकर रखी। वो इमरान ही थे, जिन्होंने वसीम अकरम, वकार यूनूस और इंजमाम-उल-हक जैसे खिलाड़ी पाकिस्तान को दिए। 39 साल की उम्र, कंधे की चोट और हार से घिरा पाकिस्तान। इन सब परिस्थियतियों के बावजूद भी इमरान ने अपनी टीम को 1992 में चैंपियन बनाया। उन्होंने अपनी आखिरी पारी में 72 रन बनाए।
जेल में बंद इमरान खान
इमरान ने राजनीति में कदम रखा, तो वे यहां भी चैंपियन बन गए और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। पाकिस्तान में सेना का राजनीति में दखल से खान भी वाकिफ थे, जब सेना के जनरल उनके खिलाफ हुए, तो वे चाहते तो पाकिस्तान से बाहर भाग सकते थे लेकिन उन्होंने लड़ने का फैसला किया। वही जज्बा, जो पहले मैदान पर दिखता था, अब उसे खान राजनीति में आजमा रहे थे। उन्होंने भागने की बजाय लड़ना चुना और उनकी योजन थी कि पाकिस्तान के लोग भारी संख्या में उनका समर्थन करेंगे लेकिन जनता ने अंतिम मौके पर धोखा दे दिया और इमरान अब जेल की काल कोठरी में बंद हैं।
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